बेटी ने किया पिता का अंतिम संस्कार
आगरा। जिस पिता ने अपनी बेटी को नाजों से पाला, हाथों के पालने से झुलाया। उसी पुत्री ने अपने पिता का अंतिम संस्कार करके साहस का परिचय दिया।
दिन के उजाले में शमशान का सन्नाटा लोगों के कदम रोकता है लेकिन रात का अंधेरा भी रजनी सैनी के कदम नहीं रोक पाया। शमशान घाट पर चारों ओर चिता जल रही थी। उसी माहौल में रात्रि 9.30 बजे उसने अपने पिता सुमेरचंद सैनी को अंतिम विदाई दी। चिता की परिक्रमा की और विधि-विधान के साथ अपने पिता का दाह संस्कार किया।
12-ए अमर बाग, दयालबाग कालोनी निवासी सुमेर चंद का गत माह निधन हो गया था। वे लम्बे समय से कैंसर से पीडि़त थे। उनका बेटा राजू, हरिद्वार के पर्यटन विभाग में कार्यरत है। कैंसर के कारण सुमेर चंद का शरीर जर्जर हो गया था। अधिक समय तक रखा नहीं जा सकता था मगर पुत्र के आने में लगातार विलम्ब हो रहा था। ऐसे में अंतिम संस्कार कौन करे? यह बात चल रही थी।
तभी उनकी विवाहित बेटी रजनी ने अपना निर्णय सभी को बता दिया कि वही अपने पिता का अंतिम संस्कार करेगी। रिश्तेदार और पड़ोसियों ने समझाने की कोशिश भी की लेकिन रजनी का संकल्प मजबूत था। वह शवयात्रा के साथ ताजगंज के शमशान घाट पर आयी। पूरे विधि-विधान के साथ मुखाग्नि देकर पिता को अंतिम विदाई दी। ताजगंज स्थित शमशान घाट में रात को भी चहल-पहल थी।
आधा दर्जन से अधिक चिता वहां जल रही थीं लेकिन आधे भाग में विद्युत लाइट खराब पड़ी थी। जिससे चार प्लेट फार्म पर बिलकुल अंधेरा था। जहां चारों शवों का टार्च की लाइट में अंतिम संस्कार किया गया। रजनी सैनी द्वारा किए गए इस साहसिक कार्य के लिए उनके पिता के अंतिम संस्कार में शरिक हुए सभी लोग दाद दे रहे थे।
बुधवार, जुलाई 07, 2010
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