शुक्रवार, जुलाई 09, 2010

जासूसी के आरोपी मुकेश को मिली जमानत

रोहतक। सूचना का अधिकार न्याय दिलाने में कितना कारगर सिद्ध हो सकता है और पीडि़त व्यक्ति को इससे कितनी राहत मिल सकती है इसका जीता जागता उदाहरण स्थानीय आर्य नगर वासी नेवी कमांडर (सेवानिवृत्त) मुकेश सैनी हैं, जो गत चार वर्षों से कथित जासूसी प्रकरण में जेल की सलाखों के पीछे थे और जिन्हें गत माह सूचना के अधिकार के बदौलत ही न्यायालय ने जमानत पर रिहा किया है। गौरतलब है कि सैनी को दिल्ली पुलिस ने जुलाई, 2006 में इस आधार पर गिरफ्तार किया था कि उनके कम्प्यूटर से ऐसे दस्तावेज प्राप्त हुए थे, जो संवेदनशील और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े थे और वह उन्हें अमेरिका की गुप्तचर संस्था सीआईए को सप्लाई कर रहे थे। मुकेश के छोटे भाई राजेश सैनी ने बताया कि दिल्ली पुलिस का कहना था कि राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद् सचिवालय ने दस्तावेजों को संवेदनशील व अनधिकृत बताया था लेकिन जब मुकेश सैनी ने आरटीआई एक्ट के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय से जानकारी ली तो परिषद ने लिखित उत्तर में बताया कि दिल्ली पुलिस ने बरामद किए दस्तावेजों के बारे में परिषद सचिवालय से कभी कोई राय नहीं ली और न ही कोई ऐसी राय पुलिस को दी गई। इसी को आधार बनाकर मुकेश सैनी ने न्यायालय में जमानत याचिका दायर की थी।

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