शुक्रवार, फ़रवरी 04, 2011

राजपूतों की जमीन पर काश्तकारी कर रहे थे सैनी


75 सालों बाद मिला मालिकाना हक

सीकर। जमीन के एक छोटे से टुकड़े को लेकर जहां भाई-भाई का दुश्मन बन जाता है और वर्षों के रिश्ते पल में खत्म हो जाते हैं, वहीं सीकर के अनोखू गांव के राजपूत परिवारों ने 150 बीघा भूमि सैनी परिवारों के नाम कर एक मिसाल कायम की है। राजपूत परिवारों ने गांव के सैनी परिवारों के 30 लोगों के नाम उक्त जमीन की रजिस्ट्री करवाई। रजिस्ट्रार कार्यालय में राजपूत व सैनी परिवारों को एक साथ देख लोग खासे अचंभित दिखे।
दरअसल, धोद पंचायत समिति क्षेत्र के अनोखू गांव में करीब 75 वर्ष पहले कासली से कुछ राजपूत व सैनी परिवार आए थे। अनोखू गांव में राजपूत समाज के लोगों ने अपने साथ आए सैनी परिवारों को करीब 150 बीघा जमीन काश्तकारी के लिए दे दी थी। सैनी परिवार 75 वर्षों से उक्त भूमि पर काश्त कर रहे थे, लेकिन जमीन राजपूत परिवारों के नाम ही थी। इस पर करीब 15 दिन पहले राजपूत व सैनी समाज के लोगों ने गांव में बैठक की। बैठक में राजपूत परिवारों ने जमीन सैनी परिवारों के नाम करवाने का निर्णय किया।
अनोखू गांव के मोतीराम सैनी ने बताया कि जिस जमीन पर वे पिछले कई वर्षों से काबिज थे अब उसका मालिकाना हक मिलने से वे खुश हैं। उन्होंने बताया कि मालिकाना हक लेने के लिए पिछले लम्बे समय से उनकी बात राजपूतों से चल रही थी। गांव में हमेशा हम सभी लोग परिवार की तरह रहे हैं। शोभसिंह ने बताया कि हमारे पूर्वजों ने जो जमीन दी थी उसे आज सैनी समाज को देकर उन्होंने एक नईे मिसाल पेश की है।

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