शनिवार, जनवरी 01, 2011

विनाशक कुरीति के लिए जिम्मेवार कौन?

आज देश में फैली नशे की लत में पड़ कर लाखों नवयुवक तथा युवतियां अपना जीवन बर्बाद कर रही है। देश में फैशन के नाम पर फैल रही अशललता एक भयंकर रूप धारण कर चुकी है। इसी का दुष्परिणाम है कि 10 फीसदी लड़कियां कुंवारी ही मां बन रही है जो इस देश के माथे पर बहुत बड़ा कलंक है। सुशिक्षा के अभाव में युवक-युवतियां अपने माता-पिता का कहना नहीं मान रहे हैं। इस पर युवाओं को ध्यानपूर्वक चिंतन करना चाहिए क्योंकि हमारे देश के हजारों युवकों ने आजादी की खातिर अपनी जान न्यौछावर की थी और आज के युवा उस आजादी का दुरुपयोग कर रहे हैं। समाज में फैली इस कुरीति के लिए प्रदेश व केंद्र सरकारें भी कम दोषी नहीं है। दु:ख की बात है कि जिस देश के 30 प्रतिशत लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे हों, वहां अरबों-खरबों रुपये दीवाली के मौके पर आतिशबाजी के रूप में खर्च किये जाते हैं। चूंकि प्रधानमंत्री स्वयं एक अर्थशास्त्री है इसलिए उन्हें इस व्यवस्था को बदलने के लिए कारगर कदम उठाने चाहिए क्योंकि इतने धन से देश में बहुत विकास कार्य हो सकते हैं। सरकार को इन कुरीतियों पर अतिशीघ्र रोक लगानी चाहिए।
                                                                              -महाश्य दयाकिशन सैनी

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