शनिवार, जनवरी 01, 2011

महंत रमाशंकर कुशवाहा ने पेश की समाजसेवा की अद्वितीय मिसाल

भीख मांगकर करवाई 600 लड़कियों की शादी

चन्द्रप्रकाश सैनी
प्रधान सम्पादक
लखनऊ। पेट भरने के लिए सड़कों पर भीख मांगने वाले भिखारी तो हर कहीं देखने को मिल जाते हैं मगर उत्तरप्रदेश मे एक ऐसे भिखारी हैं जो भीख मांगकर जुटाये गये पैसों से निर्धन, गरीब और बेसहारा लड़कियों की शादी करवाकर उनकी जिंदगी खुशहाल बनाने में जुटे हैं।
सोनभद्र जिले के निवासी रमाशंकर कुशवाहा (58) रामगढ़ कस्बे में बने शवि मंदिर के महंत है। पूरे इलाके में भिखारी बाबा के नाम से मशहूर यह शख्स अब तक करीब 600 गरीब आदिवासी व दलित कन्याओं का विवाह करवाकर उनका घर बसवा चुके हैं। भिखारी बाबा कहते हैं कि उन्हें हर बेसहारा और गरीब कन्या में अपनी बेटी नजर आती है। वे नहीं चाहते कि धन के अभाव में किसी कन्या की डोली न उठ पाये। इसलिए शादी कराके उनका जीवन सुखमय बनाने के लिए वे भीख मांगते हैं। लड़कियों की शादी में खर्च होने वाला धन जुटाने के लिए वह साल भर अपने शिष्यों के साथ घूम-घूम कर भीख मांगते हैं। बाबा का कहना है कि हर महीने के लिए करीब 15 दिन वे अपने शिष्यों के साथ सोनभद्र और आसपास के जिलों में भीख मांगते हैं। फिर शादी के मुहूर्त वाले महीनों फरवरी से जून के बीच में कोई एक दिन निर्धारित करके लोगों की मदद से शवि मंदिर परिसर में विवाह समारोह आयोजित करवातेेे हैं। भिखारी बाबा भीख मांगकर पिछले पांच सालों से सोनभद्र और आसपास के जिलों की गरीब आदिवासी और दलित लड़कियों की सामूहिक शादी कराते आ रहे हैं। बाबा के जीवन में घटी एक मार्मिक घटना ने उन्हें इस काम को अंजाम देने के लिए प्रेरित किया। बाबा कहते हैं कि साल 2005 में उनके आश्रम के पास संतोष कुमार नाम का एक युवक आया और कुएं का पानी पीकर छाया में सुस्ताने लगा। तभी उसे अचानक दिल का दौरा पड़ गया और उसकी वहीं पर ही मौत हो गई। संतोष के घर में केवल उसकी एक छोटी बहन रीता थी। भाई की मौत की खबर पाकर वह बदहवास हालत में वहां आई और रो-रोकर कहने लगी कि अब उसका क्या होगा, कौन उसकी देखभाल करेगा। उसे रोता बिलखता देख उन्होंने उसके सामने उसकी शादी कराने का ऐलान किया और उसी समय प्रण लिया कि आज से वे बेसहारा और गरीब कन्याओं की शादी कराएंगे। बाबा के मुताबिक 2005 में पहली बार रीता के साथ उन्होंने 21 गरीब कन्याओं की शादी करवाकर इस मुहिम की शुरूआत की थी। उसके बाद से लगातार यह सिलसिला जारी है। बीते साल उन्होंने 100 से अधिक कन्याओं का सामूहिक विवाह करवाया। अगलेे साल भिखारी बाबा ने 106 लड़कियों के विवाह का प्रण लिया। जिस अनाथ लड़की के माता-पिता नहीं होते, भिखारी बाबा उसके लिए उसी की जाति का वर खोज कर शादी करवाते हैं। यहीं नहीं लड़की को मां-बाप की कमी न महसूस हो, इसके लिए वह बाकायदा कन्यादान भी करते हैं। जिन लड़कियों के माता-पिता होते हैं वे अपनी बेटियों के रिश्ते खुद तय करके भिखारी बाबा के यहां शादी के लिए पंजीकरण करा देते हैं। निर्धारित तिथि के दिन बाबा सभी कन्याओं की सामूहिक शादी कराते हैं। शादी में बारातियों के स्वागत से लेकर खानपान का पूरा प्रबंध किया जाता है। लड़कियों की घर गृहस्थी का सामान दिया जाता है, जिससे कि उन्हें सफल वैवाहिक जीवन शुरू करने में मदद मिल सकें। बाबा कहते हैं कि स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी, राजनेता और व्यवसाई कन्याओं का श्रृंगार और रसोई के सामान के साथ-साथ संदूक, बिस्तर, टी.वी. और साइकिल जैसी चीजें देकर उनका नव-विवाहित जीवन खुशहाल बनाने में मदद करते आ रहे हैं।

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