सैनी संवाद ने बटोरी हिन्दुस्तान की सुर्खियां
कार्यकारी सम्पादक
रोहतक। सैनी बिरादरी में हो रही हलचल की सटीक तस्वीर पेश करने वाले मासिक समाचार पत्र सैनी संवाद ने अढ़ाई साल के अल्प समय में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। भारत के सबसे बड़े हिन्दी समाचारपत्रों में से एक दैनिक हिन्दुस्तान ने सबसे महत्वपूर्ण माने जाने वाले सम्पादकीय पृष्ठ पर सैनी संवाद पर आधारित एक विशेष लेख प्रकाशित किया है। विगत एक दिसम्बर को ब्लॉग वार्ता: जाति का ब्लागर जातिगर नामक शीर्षक से प्रकाशित यह लेख मशहूर इलेक्ट्रानिक चैनल एनडीटीवी के रिपोर्टर रवीश कुमार ने लिखा है। जिसमें उन्होंने कहा है कि सैनी संवाद अपनी जाति के लोगों को जगाने का काम कर रहा है और इसका प्रकाशन किसी प्रोफेशनल टारगेट को पाने के लिए नहीं, बल्कि सैनी समाज के लोगों में सामाजिक व राजनीतिक चेतना विकसित करने और आपसी संवाद कायम करने के लिए किया जा रहा है। इस लेख में सैनी संवाद में प्रकाशित ऐसी अनेक खबरों का भी जिक्र किया गया है, जो न केवल सूचनात्मक है, बल्कि सैनी समाज को एकजुट होने का संदेश भी फैला रही हैं।
चारों ओर से मिले बधाई संदेश
हिन्दुस्तान में सैनी संवाद पर आधारित यह लेख प्रकाशित होने के बाद सैनी समाज के लोगों ने संदेश भेजकर सैनी संवाद परिवार को बधाई दी। रतन सिंह शेखावत लिखते हैं कि सैनी संवाद की हिंदुस्तान सरीखे राष्ट्रीय समाचार पत्र में चर्चा होने पर शुभकामनाएं। फरीदाबाद से रामसिंह सैनी व रोहिणी (दिल्ली) से सुनील सैनी कहते हैं कि सैनी संवाद ब्लाग बारे किसी बड़े समाचार पत्र में लेख प्रकाशित होने से यह संतुष्टि है कि इसके माध्यम से सैनी समाज की तो कहीं चर्चा हुई।
हिन्दुस्तान में प्रकाशित लेख
ब्लॉग वार्ता : जाति का ब्लॉगर जातिगर
रवीश कुमार
जाति अपनी पहचान अब ब्लॉग की दुनिया में ठेल रही है। बिहार में बहस है कि जाति हार गई, विकास जीत गया। मगर जातियों ने अपनी राजनीतिक सोच बदली है, यह किसी ने नहीं देखा। जाति को जब तक सामने से तोडऩे की कोशिश नहीं होगी, उस पर क्रोशिया कवर चढ़ाने से कुछ नहीं होगा।
बहरहाल, बात ब्लॉग की दुनिया की हो रही है। कई जाति संगठनों को इन दिनों लग रहा है कि इंटरनेट पर फैले उनकी जाति के लोगों को जगाने का वक्त आ गया है। इसी क्रम में सैनी संवाद नाम के ब्लॉग से राब्ता हो गया। http://saini-sanvaad.blogspot.com पर क्लिक कीजिए और सैनी समाज की आकांक्षाओं की दुनिया में प्रवेश कर जाइए। ब्लॉगर की जगह जाति के ब्लॉगर को जातिगर कहा जाना चाहिए। ब्लॉग के प्रवर्तक रोहतक के चंद्रप्रकाश सैनी लिखते हैं कि इसका प्रकाशन किसी प्रोफेशनल टारगेट को पाने के लिए नहीं बल्कि सैनी समाज के लोगों में सामाजिक व राजनीतिक चेतना विकसित करने और आपसी संवाद कायम करने के लिए किया जा रहा है। दिल्ली की एक घटना में तीन सिपाहियों को सम्मानित करने की खबर है। संयोग से तीनों बहादुर सैनी हैं। इसका शीर्षक है- हिम्मती सैनी भाइयों को कमिश्नर ने दिया पुरस्कार। सैनी डायग्नोस्टिक लैब के एमडी डॉ. नरेंद्र सैनी ने बताया कि थायरॉयड चेक कराने चाहिए। एक अखबार से ली गई इस खबर को ब्लॉग पर इसलिए जगह मिली है क्योंकि बयान देने वाले कुछ डॉक्टरों के साथ एक डॉक्टर का नाम नरेंद्र सैनी है, लेकिन दूसरी तरफ इस खबर को भी छापा गया है कि यूपी के एक मंत्री धरम सिंह सैनी की कार के काफिले के नीचे एक बच्चा आ गया। मंत्री को पता था कि उनके काफिले में पार्टी कार्यकर्ताओं की गाड़ी शामिल है। ये लोग बेसिक शिक्षा मंत्री धरम सिंह सैनी के परिचित थे यानी सैनी समाज का कोई गलत काम भी करेगा तो भी सैनी-संवाद उसे नहीं बख्शेगा। ब्लॉग पर कई दिलचस्प चीजें भी हैं, मसलन हांसी से संतराम सैनी की खबर है। उन्हें साठ बार सांप डस चुके हैं। वे यह सर्प दंश पिछले 14 साल से ङोल रहे हैं। सांप उन्हें अब और न काटे इस डर से वे एक पिंजरे में रहने लगे हैं यानी इंसान पिंजरे में हैं और सांप बाहर घूम रहे हैं। ऐसा कैसे हो सकता है कि रोहतक में सैनी मार्केट बने और इस ब्लॉग पर खबर न आए। इसे पढ़कर मन में एक सवाल उठा कि क्या रोहतक के सारे सैनी इसी मार्केट में खरीदारी करने आएंगे? सभी जातियां अपनी पहचान खोज रही हैं। सत्ता के शीर्ष पर अपनी बारी आने का इंतजार कर रही हैं। रास्ता लंबा है, इसलिए वे किसी गठबंधन का हिस्सा होकर सत्ता के लघु पद वितरण समारोह का हिस्सा बन रही हैं। कोई जाति यह नहीं कहती या कोई जातिगत संगठन यह नहीं कहता कि वे जाति की राजनीति के खिलाफ हैं, बल्कि अपनी हिस्सेदारी मांगता है। फिर कैसे हम कह सकते हैं कि बिहार के नतीजे में जाति की जीत नहीं है। हरियाणा विधानसभा के चुनाव के समय की एक पोस्ट है, जिसका शीर्षक है एकजुटता ही दिला सकती है मुकाम। चंद्र प्रकाश सैनी लिखते हैं कि सैनी बिरादरी के नेताओं में भी बड़े राजनीतिक दलों की टिकटों के लिए संघर्ष शुरू हो गया है। मगर जिस प्रकार से सैनी बिरादरी के नेताओं में एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ मची हुई है, वह कहीं इस बार भी बिरादरी के लिए घातक न साबित हो जाए। इसी वजह से सैनी बिरादरी के लोग हक के अनुपात में टिकट नहीं ले पाते हैं। एक और लेख में हरियाणा के लाड़वा विधानसभा का जिक्र है। सैनी संवाद के समाचार संपादक राजेंद्र सैनी लिखते हैं कि लाड़वा ही अकेला क्षेत्र है, जहां प्रत्याशी के भाग्य का फैसला सैनी बिरादरी करती है। इस ब्लॉग पर एक और सूचना है। आईएएस में मुकेश सैनी ने पाया 551वां स्थान। पिछले साल की पोस्ट है यह। राजस्थान के अन्य जातियों के सफल उम्मीदवारों के भी नाम हैं, लेकिन जोगिन्दर सैनी का यह लेख हैरान करता है। मुरादाबाद की खबर है। जाट बिरादरी की खाप पंचायतों की भांति सैनी जाति की पंचायतें भी फरमान सुनाने और उन्हें क्रियान्वित करवाने में कतई पीछे नहीं हैं। यह सच्चाई एक बार फिर उस समय उजागर हो गई जब उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में सैनी बिरादरी पंचायत ने प्रेमी युगल को सरे-बाजार गंजा करवा उसका जुलूस निकाल दिया। काश कि इस फैसले की सैनी-संवाद ब्लॉग आलोचना करता। शायद इसीलिए तमाम घोषित मकसदों के बाद लगता है कि जातिगत संगठन आखिर में अपनी जाति पर नियंत्रण ही चाहते हैं।
(Net link: http://www.livehindustan. com/news/editorial/guestcolumn/57-62-148250.html)




