बुधवार, मार्च 17, 2010

रिजर्व हुई नया गांव की बीर बरकताबाद पंचायत

सैनी बिरादरी के हाथ से निकला सरपंची का ताज

महेन्द्र तोंदवाल
कार्यकारी सम्पादक
बहादुरगढ़। अपना राजनैतिक हक पाने के लिए संघर्ष कर रही सैनी बिरादरी के हाथ से सरपंची का एक और ताज निकल गया है। बहादुरगढ़ उपमंडल में पिछले लम्बे समय से सैनी बिरादरी के वर्चस्व को कायम रखने वाली बीर बरकताबाद पंचायत को विभाजित कर न केवल दो नई पंचायतें बना दी गई है, बल्कि सैनी बहुल क्षेत्र के हिस्से आई बीर बरकताबाद सैनीयान पंचायत को भी अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित कर दिया गया है। लिहाजा निकट भविष्य में होने वाले चुनाव में सैनी बिरादरी के बाशिंदे चाह कर भी यहां से सरपंच पद का चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। मगर इस समूचे घटनाक्रम के बीच सैनी बिरादरी के लिए एक संतोषजनक बात यह है कि पंचायत हलके में अपने निर्णायक वोट बैंक के चलते इस चुनाव में वह किंग मेकर की भूमिका में अवश्य नजर आएगी।
यहां बता दें उक्त पंचायत के सरपंच पद को लेकर सैनी व जाट बिरादरी के लोगों में पिछले लम्बे समय से जबरदस्त लागबाजी चली आ रही थी। जिस वजह से दोनों ही बिरादरी के लोगों को सरपंच चुनाव में अपने प्रत्याशियों को जितवाने के लिए ऐडी-चोटी का जोर लगाना पड़ रहा था। मगर पिछली कई योजनाओं में अधिकांश बार सैनी बिरादरी के प्रत्याशियों ने जीत हासिल कर यहां अपना वर्चस्व कायम कर लिया था। यही कारण था कि पांच साल पूर्व सरपंच के चुनाव के समय जाट व सैनी समुदाय के लोगों के बीच जमकर खूनी संघर्ष हुआ था और इसमें कई लोग घायल हो गए थे। दोनों ही बिरादरियों ने राज्य स्तर पर अपनी-अपनी जाति की पंचायतें बुलाकर जहां इस मामले को गंभीर बना दिया था, वहीं दोनों बिरादरियों में भयंकर टकराव की स्थिति भी उत्पन्न हो गई थी। आलम यह था कि सैनी बिरादरी के लोगों को तो अपनी बात कहने के लिए केंद्र की तत्कालीन यूपीए सरकार की अघोषित मुखिया एवं कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी से भी मिलना पड़ा था। इसी मामले में प्रशासन पर पक्षपात का आरोप भी लगा था लेकिन बाद में राजनेताओं व अन्य समाजसेवी लोगों की मदद से यह मामला गांव स्तर पर सुझला लिया गया था मगर पुलिस ने तब तक इस मामले में दोनों ही बिरादरियों के दर्जनों लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत क्रॉस केस दर्ज कर लिया था। अभी भी यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है।
हालांकि उस चुनाव में जाट समुदाय से कोई भी प्रत्याशी खड़ा नहीं किया गया था मगर इस समुदाय के लोगों ने अपना समर्थन सैनी समाज के प्रत्याशी रूपचंद सैनी को कड़ी टक्कर दे रहे पंडित संतराम शर्मा को दे दिया था। बावजूद इसके रूपचंद सैनी चुनाव जीतने में कामयाब हो गए थे। चुनाव सम्पन्न होने के बाद भी दोनों समुदायों में तनाव की स्थिति बनी हुई थी, जिसे प्रशासनिक अधिकारियों ने बखूबी भांप लिया था और भविष्य में होने वाले चुनावों में दोनों बिरादरियों के बीच टकराव की स्थिति उत्पन्न न हो, इसके लिए तभी से बीर बरकताबाद पंचायत को विभाजित करने की मुहिम शुरू हो गई थी। लिहाजा यह तो तय माना ही जा रहा था कि इस पंचायत को दो हिस्सों में बांटा जाएगा मगर इस बात का अंदाजा किसी भी बिरादरी खासतौर पर सैनी समाज को नहीं था कि यह एस.सी. के लिए रिजर्व हो जाएगी। इसी कारण सैनी बिरादरी के लोग इस बार तो अपनी निर्विवाद जीत मानकर चल रहे थे। मगर उनकी उम्मीदों पर उस समय पानी फिर गया जब आरक्षित पंचायतों के लिए निकाले गए ड्रा में किस्मत ने सैनी समाज का साथ नहीं दिया और बीर बरकतावाद सैनीयान पंचायत की पर्ची निकल गई।

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