शिकायत मिलने पर विजीलेंस टीम ने की कार्रवाई
जोगेन्द्र सैनी
हमारे संवाददाता
यमुनानगर। वसीयत का पंजीकरण करने की एवज में 4500 रुपये रिश्वत लेते हुए अंबाला विजीलेंस की एक टीम ने विगत 16 सितम्बर की देर शाम साढ़ौरा के नायब तहसीलदार रमेश सैनी व उसके चपड़ासी जागीर सिंह को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। नोटों पर पाउडर लगा हुआ था जब उनके हाथ पानी से धुलवाए गए तो दोनों के ही हाथ कैमिकल से लाल हो गए। तदोपरांत विजीलेंस टीम दोनों को अपने साथ जिला कार्यालय में ले आई और सभी कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करवा दिया।
विजीलेंस से मिली जानकारी के अनुसार साढ़ौरा में दयालवाला मंदिर है। मंदिर के महंत श्यामदास को अपने चेले शोभादास के नाम पर मंदिर की जमीन की रजिस्टरी करवानी थी। मंदिर का मामला होने के कारण रजिस्टरी में कुछ अड़चनें आ रही थीं। रजिस्टरी करवाने की एवज में नायब तहसीलदार रमेश सैनी ने कथित रूप से कुछ दिन पहले महंत से 10 हजार रुपये की मांग की थी। मगर महंत के चेले शोभादास ने इतनी रकम देने से मना कर दिया था। आखिर में काफी देर तक चली बातचीत के बाद पांच हजार रुपये देने पर समझौता हो गया। रुपये देने का दिन कार्यालय की छुट्टी के बाद तय किया गया था। इसी दौरान उन्होंने विजिलेंस की टीम को नायब तहसीलदार द्वारा रिश्वत मांगे जाने की सूचना दी। सूचना मिलते ही विभाग द्वारा एक टीम गठित की गई, जिसमें सीटीएम यमुनानगर नवीन कुमार आहूजा को ड्यूटी मजिस्ट्रेट बनाया गया और उसमें डीएसपी विजिलेंस अंबाला को भी शामिल किया गया।
सीटीएम ने योजनाबद्ध तरीके से शाम साढ़े पांच बजे शोभादास को कैमिकल लगे पांच हजार रुपये देकर तहसील कार्यालय में भेजा। शोभादास ने पांच हजार रुपये चपड़ासी जागीर सिंह को दिए। जागीर सिंह ने यह राशि नायब तहसीलदार रमेश सैनी को दे दी। शोभादास बाहर आया तो उसने विजिलेंस की टीम को इशारा कर दिया। इशारा पाते ही सीटीएम ने दोनों को पकड़ लिया और उनके हाथ धुलवाए। इस पर दोनों के हाथ लाल हो गए। पुलिस ने उनके पास से रिश्वत के रुपये भी बरामद कर लिए। विजीलेंस टीम दोनों को अपने साथ जगाधरी अनाज मंडी के निकट स्थित विजिलेंस कार्यालय में ले आई और दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर दिया गया।
शनिवार, अक्टूबर 16, 2010
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