सांझे प्रयासों से मिली आंशिक कामयाबी
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| चन्द्रप्रकाश सैनी |
सामूहिक कोशिशों में किस कदर सफलता के मूल मंत्र का समावेश होता हैं, इसका अंदाजा गत 13 फरवरी को पुलिस हिरासत में मौत का शिकार हुए हांसी के सैनीपुरा वासी सुभाष सैनी के प्रकरण से सहज ही लगाया जा सकता है। इसे घटना के तुरंत बाद से ही सैनी समाज द्वारा प्रतिक्रिया स्वरूप की गई निर्णायक कार्रवाई का ही प्रतिफल कहा जायेगा कि कई सप्ताह के लम्बे समय के बाद ही सही मगर
आखिरकार हम पुलिस पर दबाव बनाकर सुभाष की हत्या का केस दर्ज करवाने में कामयाब हो ही गये। मगर फिलहाल इस कामयाबी को आंशिक कहना ही ठीक रहेगा क्योंकि बेशक हम हत्या का मामला दर्ज करवाने के साथ-साथ सैकड़ों सैनी भाइयों के खिलाफ दर्ज किये गये पुलिस चौकी में तोडफ़ोड़ व आगजनी फैलाने के मामले को भी वापस करवाने में सफल हो गये हो मगर जब तक प्रदेश सरकार द्वारा सुभाष के परिजनों को वांछित आर्थिक सहायता के साथ-साथ जीवन यापन का कोई स्थाई जरिया मुहैया नहीं करवाया जाता तब तक इस कामयाबी को सम्पूर्ण ठहराना जायज नहीं है। लिहाजा अब ऐसे माहौल में अपने आप को सैनी समाज का खेवनहार कहने वाले उन नेताओं को आगे आकर सरकार पर दबाव बनाना चाहिए, जो घटना के परिणाम स्वरूप सैनी समाज में भड़के आक्रोश को शांत करने के लिए सरकार के कहने पर ही सुभाष के घर आर्थिक मदद लेकर पहुंचे थे। यदि ये नेता वास्तव में ही सुभाष के परिजनों के प्रति संवेदना रखते हैं या फिर सैनी समाज की भलाई चाहते हैं तो वे सुभाष के परिजनों के स्थाई रोजगार का जुगाड़ करवाने के लिए सतत संघर्ष कर उसे चरितार्थ करवाये। यदि ऐसा होता है तो समूचे सैनी समाज की ओर से सुभाष सैनी को यह निसंदेह एक सच्ची एवं व्यापक श्रद्धांजलि होगी।
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