शनिवार, दिसंबर 05, 2009

सैनी संस्था का चुनाव करवाने सम्बंधी याचिका खारिज

वादियों ने की थी एक साल के भीतर चुनाव करवाने की मांग

महेन्द्र तोंदवाल / कार्यकारी सम्पादक

रोहतक। उत्तर भारत में सैनी बिरादरी की सबसे बड़ी सैनी एजूकेशन सोसायटी रोहतक का चुनाव एक साल में करवाने सम्बंधी याचिका को सिविल जज की अदालत ने खारिज कर दिया है। साथ ही अदालत ने यह भी कहा है चूंकि सोसायटी के प्रधान व सचिव के पक्ष पर कोई वित्तीय गड़बड़ी नहीं पाई गई है इसलिए उन्हें सोसायटी के खाते ऑपरेट करने से नहीं रोका जा सकता। यह याचिका कृपाल नगर वासी चन्द्रभान सैनी व सैनी आनंदपुरा वासी सूरत सिंह सैनी द्वारा संयुक्त रूप से दायर की गई थी और इसमें सैनी सोसायटी के चुनाव एक माह के भीतर करवाने तथा प्रधान व सचिव को सोसायटी के खाते ऑपरेट करने पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी।
याचिका में दोनों वादियों का कहना था कि सैनी एजूकेशन सोसायटी के संविधान के मुताबिक सोसायटी की मैनेजिंग कमेटी का कार्यकाल महज एक साल है जबकि यह समयावधि बीत जाने के बावजूद अभी तक प्रधान विजय सैनी की अगुवाई वाली मैनेजिंग कमेटी ने सोसायटी के चुनाव करवाने सम्बंधी कोई भी अधिसूचना जारी नहीं की है। दोनों वादियों का कहना था कि उन्होंने इस सम्बंध में सोसायटी की मैनेजिंग कमेटी को दो बार नोटिस भेजकर उनसे सोसायटी का चुनाव करवाने के लिए 15 दिन का समय भी दिया था मगर कमेटी ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया।
इस याचिका के जवाब में सैनी एजूकेशन सोसायटी का कहना था चूंकि उनके द्वारा संचालित संस्थान महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय से सम्बद्ध है इसलिए इस पर विश्वविद्यालय के नियम लागू होते हैं और विश्वविद्यालय के कलेंडर वोल्यूम-एक में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि जो भी एजूकेशन सोसायटी विश्वविद्यालय से सम्बद्ध है, उसकी गवर्निंग बॉडी का कार्यकाल तीन वर्ष का होगा। लिहाजा एक साल के भीतर पुन: चुनाव करवाने का कोई तुक नहीं बनता।
दोनों पक्षों की दलील सुनने और प्रस्तुत दस्तावेजों का अध्ययन करने के बाद सिविल जज (जूनियर डिवीजन) नेहा नोहरिया ने चंद्रभान सैनी व सूरत सिंह सैनी द्वारा चुनाव करवाने सम्बंधी याचिका को खारिज कर दिया। साथ ही उनकी सैनी सोसायटी के प्रधान व सचिव पर सोसायटी के खाते ऑपरेट करने पर रोक लगाने की गुहार को भी यह कहकर मानने से इंकार कर दिया कि वे न तो प्रधान और न ही सचिव के खिलाफ कोई ऐसा दस्तावेज पेश कर पाए जिससे यह साबित हो सके कि दोनों ही पदाधिकारी खाते ऑपरेट करने में कोई गड़बड़ी कर रहे हैं।

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