अमृतसर। यह उन लोगों के लिए एक संदेश है, जो बेटों के लिए भू्रण में ही कन्या की हत्या करवा देते हैं। बदल रही जीवन शैली में रूढ़ीवादी परंपरा को पीछे छोड़ उच्च शिक्षा प्राप्त दो बेटियों ने समाज के सभी बंधनों को तोड़ते हुए अपने पिता दीनानाथ सैनी की चिता को मुखाग्नि देकर मिसाल कायम की है।
जलियांवाला बाग के निकट स्थित हलवाई की दुकान करने वाले दीनानाथ सैनी की मृत्यु लंबी बीमारी के बाद हो गयी। उनका एक बेटा डा. विजय सैनी व दो बेटियां डा. अनीता सैनी व सुनीता सैनी हैं। उनके बेटे की मौत 12 वर्ष पूर्व एक सड़क दुर्घटना में हो गई थी। पिता की मौत पर दोनों बेटियों ने चाटीविंड स्थित श्मशान घाट में बाप की चिता को मुखाग्नि दी। सिख धर्म के अनुसार दीनानाथ को मुखाग्नि देने से पहले अरदासी सिंह ने अरदास की।
शनिवार, दिसंबर 05, 2009
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