लोगों को खूब रास आई चित्रकला प्रदर्शनी
राजस्थान। आईफैक्स कलादीर्घा में चित्रकार जे.एस. सैनी द्वारा बनाए गए चित्रों की प्रदर्शनी में प्रकृति और अध्यात्मकता का अदभुत मिश्रण है। इस चित्रकला प्रदर्शनी में कलाकार ने प्रकृति के साथ इंसानों के आत्मिक संबंधों को दर्शाने की कोशिश की है। चित्रों में प्रकृति की सतरंगी छटाओं के साथ इंसानी भावनाएं कैद हैं। उनके चित्रों में कहीं पर प्रकृति के रूप में ईश्वर की प्रतिमाएं झांकती हैं तो कहीं पर वक्त अपना महत्व बताता है। प्राकृतिक रंगों में डूबे उनके चित्र जंगली फूलों की खुशबू और जिंदगी की अनजानी डगर का अहसास कराते हैं जो दर्शकों में नई प्रेरणा, ऊर्जा व चेतना का संचार करते हैं। जे.एस. सैनी ने बताया कि प्रकृति और अध्यात्म का उतना ही करीबी संबंध है जितना ईश्वर और इंसान का। ईश्वर प्रकृति के रूप में इंसानों के करीब रहते हैं। जब इंसान प्रकृति के करीब रहता है तो प्रकृति भी उसके अनुरूप ढल जाती है। प्रकृति से दूर जाने की चेष्टा भर से वही जीवनदायनी प्रकृति उस पर विपदा बन कर टूट पड़ती है। प्रकृति के इस नियम को जो समझ जाए उसे प्रकृति में ही ईश्वर की प्राप्ति हो जाती है। जो न समझ पाए वह अज्ञानी बन कर उसके करीब तो रहता है किंतु उसे समझ नहीं पाता। ऐसे इंसान को नादान ही कहा जाएगा। पेड़, पौधे, जंगल, हवा, पानी अनगिनत फूल, पक्षी एवं जन-जीवन सभी ईश्वर के ही प्रतिरूप हैं। इस प्रदर्शनी में कलाकार ने इंसान के चारों ओर फैली प्राकृतिक संपदा के हर रंग-रूप को अपनी अभिव्यक्ति में ढाल कर पेश किया है। प्रदर्शनी में रखे चित्रों में प्रकृति की अनमोल छटा और जंगली फूलों में बसी खुशबू की महक उनके कैनवास पर रंगों के जरिए छिटक गई है। पिछले कई वर्षों से वह अपने चित्रों की प्रदर्शनी लगा रहे हैं। उनका विषय हमेशा प्रकृति एवं उसके साथ जुड़े इंसान ही होते हैं। अपनी अनुभूति के अनुसार वह प्रकृति के रंगों में अपनी कल्पनाओं के रंग उड़ेल देते हैं। उन रंगों से तैयार होता है, प्रकृति का एक ऐसा नया रंग जिसमें इंसानी जज्बात मिले होते हैं। उनके चित्रों में इंसानी उत्साह, ऊर्जा व सपनों के अक्स दिखाई देते हैं।
उनके अनुसार हर प्रदर्शनी चित्रकार का उत्साह बढ़ाती है। यही उत्साह उन्हें हर बार मजबूर करता है कि वह अपने चारों तरफ के वातावरण के बारे में नए सिरे से सोचें और कल्पनाओं से उसमें अभिव्यक्तियों के नए रंग भर दे ।
शनिवार, दिसंबर 05, 2009
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