वर्ष 2005 में हुए विधानसभा चुनाव की तुलना में सैनी बिरादरी के नेताओं को बेशक इस बार बड़े राजनैतिक दलों के टिकट अधिक संख्या में मिले हो मगर वास्तव में हमारे नेता एक बार फिर उस कांग्रेस पार्टी पर अधिकाधिक टिकट पाने का दबाव बनाने में नाकामयाब रहे हैं, जिसके प्रत्याशियों को चुनावी लाभ मिलने की संभावना अन्य पार्टियों के प्रत्याशियों से फिलहाल अधिक नजर आ रही है क्योंकि चुनाव में किसी भी विपक्षी पार्टी का गठबंधन न होने से जहां विपक्ष पूरी तरह से बिखरा पड़ा है, वहीं उनके पास कांग्रेस के खिलाफ ऐसे गंभीर मुद्दों का भी अभाव स्पष्ट तौर पर दिखाई दे रहा है, जो उन्हें चुनावी बढ़त दिला सकें। वैसे भी कांग्रेस सरकार बनने के सवा चार साल बाद गत मई माह में हुए लोकसभा चुनावों में प्रदेश की जनता कांगे्रस को 9 सीटों पर जीत दिलवाकर उसमें फिर से अपनी आस्था व्यक्त कर चुकी है। जो यह स्पष्ट करती है कि कांगे्रस फिलहाल उस घातक एंटीइनकमबेंसी से काफी हद तक बची हुई नजर आ रही है, जो चुनावों में अच्छी-अच्छी सरकारों के छक्के छुड़ा देती है।
खैर, सैनी बिरादरी के लिए संतोष एवं खुशी की बात यह है कि कैलाशो सैनी लाड़वा से कांग्रेस टिकट हासिल करने में कामयाब रही क्योंकि कैलाशो पिछले लम्बे समय से समाज उत्थान के लिए तो काम कर ही रही है, साथ ही साथ हरियाणा के राजनैतिक पटल पर भी सैनी बिरादरी का कुशलतापूर्वक प्रतिनिधित्व कर रही है। यही वजह है कि वह दो बार लोकसभा सदस्य निर्वाचित होने में भी कामयाब रही है।
लिहाजा सैनी संवाद की समस्त टीम भारी मतों से कैलाशो की जीत की कामना करती है और लाड़वा मेंं रहने वाले सैनी समाज के सभी बाशिंदों से आह्वान करती है कि वह एकजुट होकर कैलाशो सैनी के पक्ष में अपना मत दें ताकि यह नेत्री राजनीति के शिखर तक पहुंच सकें।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें