वित्तायुक्त ने रद्द किए पुराने आदेश
हिसार। वित्तायुक्त एससी चौधरी ने नगर परिषद प्रधान व पार्षद पद से निलंबित बिहारी लाल राड़ा की याचिका पर 14 सितम्बर को सुनवाई करते हुए उनके पक्ष में अपना फैसला सुना दिया। वित्तायुक्त ने निकाय विभाग के निदेशक महावीर सिंह द्वारा सुनाए गए आदेशों को निरस्त कर करते हुए राड़ा के प्रधान पद व सदस्यता को बहाल कर दिया। यह फैसला आने के एक दिन बाद ही राड़ा ने प्रधान पद पर ज्वायन भी कर लिया। निकाय विभाग के निदेशक के आदेशों के चलते ही बीते माह राड़ा को उनके पद व सदस्यता से निलंबित कर दिया गया था। उन पर तीन साल पूर्व नगर में सड़कों के निर्माण का कार्य अपने चहेते ठेकेदारों को दिए जाने का आरोप था।
नगर परिषद के पूर्व प्रधान अरविंद खरींटा ने विजिलेंस को शिकायत कर आरोप लगाया था कि नप प्रधान राड़ा ने 19 सितंबर 2006 को टेंडर के माध्यम से नगर की 42 सड़कों के निर्माण के लिए दिया और कार्य अपने चहेते ठेकेदारों को समान रूप से बांट दिया। इतना ही नहीं कुछ काम अप्रत्यक्ष रूप से खुद भी ले लिए तथा सड़क निर्माण कार्य के नाम पर घोटाला किया। इस शिकायत में नप प्रधान राड़ा के अलावा नगर परिषद हिसार के म्यूनिसिपल इंजीनियर, कनिष्ठ अभियंता व ठेकेदारों सहित 37 लोगों को आरोपित किया गया था। विजिलेंस ने इस मामले की जांच करने के बाद शिकायत के तथ्यों को सही करार देते हुए सभी आरोपियों के खिलाफ 14 फरवरी 2009 को मुकदमा दर्ज कर निकाय विभाग को सूचित कर दिया था। जिस पर विभाग ने नप प्रधान को नोटिस जारी कर इस बारे में अपना पक्ष रखने के लिए कहा था। निकाय विभाग ने इस मामले में नप प्रधान का पक्ष अंतिम बार 16 जुलाई को सुना था तथा राड़ा को उनके प्रधान पद व नगर परिषद की सदस्यता से निलंबित कर दिया था।
निकाय विभाग के आदेशों को राड़ा ने वित्तायुक्त की अदालत में चुनौती दी थी। मामले पर विचार करते हुए वित्तायुक्त ने राड़ा की दलीलों को सही ठहराते हुए निकाय विभाग द्वारा उनके खिलाफ जारी किए गए आदेशों को निरस्त करते हुए नप प्रधान पर उनकी बहाली कर दी थी। वित्तायुक्त का यह फैसला आते ही राड़ा समर्थकों ने लड्डू बांटकर खुशियां मनाई। वहीं, बिहारी लाल राड़ा का कहना है कि याचिका पर हुई बहस में कई पहलुओं पर चर्चा हुई थी और वित्तायुक्त ने उनकी दलीलों को सही ठहराते हुए उनके पक्ष में फैसला सुना दिया।
बुधवार, अक्टूबर 14, 2009
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