फर्जी शिकायत होने के बावजूद हिम्मत नहीं हारी प्रभु दयाल ने
नवलगढ़। फर्जी मनीऑर्डर जारी कर षड्यंत्रपूर्वक भुगतान उठा लेने के आरोपी डाक विभाग के एक दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी को न्यायालय ने 24 साल बाद आरोपों से बरी कर दिया है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट राजेन्द्र बंसल ने मामले की सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। जानकारी के अनुसार 11 जून 1985 को तत्कालीन डाक अधीक्षक झुंझुनूं ने बडवासी डाकघर में कार्यरत दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी प्रभुदयाल सैनी चोबदारों की ढाणी निवासी प्रभुदयाल सैनी के खिलाफ फर्जी मनीऑर्डर जारी कर उनका भुगतान उठा लेने का मामला दर्ज कराया था। मामले में प्रभुदयाल पर 14 हजार 750 रूपए हड़प लेने का आरोप लगाया गया था। पुलिस ने छानबीन के बाद चालान पेश किया। इस दौरान सरकारी वकील ने 21 गवाहों के बयान कराए तथा 95 दस्तावेज प्रस्तुत किए। दूसरी तरफ बचाव पक्ष के वकील आनंदीलाल सैनी ने तर्क दिया कि मनीऑर्डर जारी करने के लिए उसके पीछे लगाई जाने वाली आबलॉक मोहर सिर्फ पोस्टमास्टर के पास ही होती है। वह अन्य किसी कर्मचारी के पास नहीं आ सकती, इसलिए सारे आरोप गलत हैं। न्यायाधीश ने दोष साबित नहीं होने पर आरोपी को दोषमुक्त करने के आदेश दिए।
बुधवार, अक्टूबर 14, 2009
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