विश्लेशन : हरियाणा विधानसभा चुनाव २००५
महेंद्र तोंदवाल / कार्यकारी संपादक
रोहतक। वर्ष 2005 में हुए दसवें विधानसभा चुनाव में सैनी बिरादरी के मुख्य तौर से 14 नेताओं ने चुनावी दंगल में ताल ठोकी थी मगर कोई भी प्रत्याशी चुनाव जीतने में कामयाब नहीं हो पाया था। इन 14 में से नौ पार्टी टिकटों पर जबकि पांच ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर अपनी किस्मत आजमाई थी। पिछले चुनाव में भाजपा ने सर्वाधिक तीन टिकटें (कुरुक्षेत्र के पेहवा हलके से बलबीर सैनी, अम्बाला के नारायणगढ़ हलके से सुमेर सिंह सैनी व कुरुक्षेत्र की थानेसर सीट से गुरदयाल सैनी) सैनी समाज को दी थी जबकि कांग्रेस ने सफीदो (जींद) से कर्मवीर सैनी, बसपा ने अम्बाला के नारायणगढ़ हलके से सतपाल सैनी, इनेलो ने जगाधरी से डा. बिशन सिंह सैनी, लोक जनशक्ति पार्टी ने नग्गल हलके से जसपाल सैनी को अपना प्रत्याशी बनाया था। इसके अलावा पूर्व मंत्री हरि सिंह सैनी समेत दो अन्य नेताओं ने बतौर आजाद प्रत्याशी हिसार विधानसभा सीट तथा अर्जुन सैनी ने बल्लभगढ़ सीट से अपनी किस्मत आजमाई थी। इन सभी प्रत्याशी में पेहवा से बलबीर सैनी सबसे कम 3653 वोटों से कांग्रेस के हरमोहिंदर सिंह चट्ठा से पराजित हुए थे। इसके अलावा हिसार से हरि सिंह सैनी कांग्रेस के ओम प्रकाश जिंदल से 10876 तथा सफीदो से कर्मवीर आजाद प्रत्याशी बचन सिंह आर्य से 17644 वोटों से हारकर दूसरे स्थान पर रहे थे। हिसार से पूर्व मंत्री के अलावा हरि सिंह सैनी नाम के ही दो अन्य निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी यहीं से अपना भाग्य आजमाया था। इसके अलावा नारायणगढ़ से चुनाव लडऩे वाले भाजपा प्रत्याशी सुमेर चंद सैनी 8756 वोटों के साथ चौथे तथा बसपा प्रत्याशी सतपाल सैनी 5517 मतों के साथ पांचवें स्थान पर रहे थे। जगाधरी हलके से इनेलो प्रत्याशी डा. बिशन सिंह सैनी 21284 वोटों के साथ तीसरे तथा नग्गल से निर्दलीय जसपाल सैनी आठवें स्थान पर रहे थे। थानेसर से भाजपा प्रत्याशी गुरदयाल सैनी 12637 मतों के साथ तीसरा स्थान ही हासिल कर पाए थे। इसी तरह बल्लभगढ़ से अर्जुन सिंह सैनी ने बतौर आजादी प्रत्याशी चुनाव लड़ा था और नौवें स्थान पर रहे थे। सैनी समाज से उचित सहयोग न मिल पाने की वजह से ही उन्हें इस स्थिति का सामना करना पड़ा था।
बुधवार, सितंबर 02, 2009
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