मंगलवार, जून 23, 2009

कनाडाई क्रिकेट को नया जीवन देने में जुटे हैं भारतीय

टोरंटो । कनाडाई हॉकी को नया जीवन देने के बाद यहां के भारतीय मूल के लोग क्रिकेट को जीवित करने में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। कनाडा की फील्ड हॉकी टीम में सात भारतीय मूल के खिलाड़ी हैं।
एक तरफ जहां कनाडा क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष बनवारीलाल (बेन) सेनिक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अतुल आहूजा अपने स्तर पर कनाडाई क्रिकेट को फिर से मुख्य धारा में लाने का प्रयास कर रहे हैं, वहीं भारतीय मूल के आठ खिलाड़ी भी इनके साथ कदम से कदम मिलाकर काम कर रहे हैं।
कनाडा की क्रिकेट टीम में शामिल आठ भारतीय मूल के खिलाड़ियों में छह तो भारत से आए हैं, जबकि दो गुयाना के हैं।
इनमें सबसे पहला नाम आशीष बगई का है, जो एक शानदार बल्लेबाज और विकेटकीपर हैं। पिछले विश्व कप में आस्ट्रेलिया के धुरंधर विकेटकीपर एडम गिलक्रिस्ट ने उनकी जमकर तारीफ की थी।
दूसरे खिलाड़ी हैं गुजरात में जन्मे आसिफ अब्दुल्ला मुल्ला। मुल्ला टीम की बल्लेबाजी की रीढ़ हैं। यही नहीं, जरूरत पड़ने पर मुल्ला विकेटकीपर की भूमिका भी निभा सकते हैं।
अन्य खिलाड़ी हैं, पूर्व भारतीय रणजी ट्राफी खिलाड़ी डब्ल्यू. डी बालाजी राव, जिन्हें हाल ही में कनाडाई आक्रमण पंक्ति में शामिल किया गया है। 30 वर्ष के राव ने पिछले महीने वेस्ट इंडीज के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय करियर शुरू किया है।
कनाडा की टीम में एक मैच जिताऊ हरफनमौला खिलाड़ी भी हैं, जिनका नाम करुण जेती है। पुलिस की नौकरी करने वाले 24 साल के जेती को कनाडाई क्रिकेट में लंबी रेस का घोड़ा कहा जा रहा है।
चंडीगढ़ में जन्मे हरवीर सिंह वाधवान भी हरफनमौला खिलाड़ी के तौर पर जाने जाते हैं। इसी तरह पंजाब में जन्मे अनुराज गुप्ता, जो कनाडाई सशस्त्र पुलिस में कैप्टन हैं, क्रिकेट टीम के अभिन्न सदस्य हैं। आहूजा उन्हें एक अच्छा बल्लेबाज और कारगर विकेटकीपर बताते हैं।
आखिर में आहूजा कहते हैं आईसीसी के मानदण्डों के हिसाब से तैयार कनाडा की एकमात्र क्रिकेट अकादमी 'मैपल लीफ क्रिकेट फेसिलिटी' के अध्यक्ष राजेंद्र सैनी भी संयोग से भारतीय हैं।
(आईएएनएस)

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