विनोद सैनी
हमारे संवाददाता
मुजफ्फरनगर । मई माह में सैनी समाज को जिस घटना ने हिलाकर रख दिया, वह थी उत्तरप्रदेश के मुज्जफरनगर जिले में प्रेम प्रकरण को लेकर युवक अजीत सैनी (23) की गई तथाकथित हत्या। हत्या के जुर्म में अजीत की प्रेमिका अंशु तोमर के भाई व पिता को पुलिस ने न केवल गिरफ्तार किया, बल्कि उनसे हत्या करने की बात भी कबूलवा ली। मगर इस बीच थाने में अजीत व अंशु का फिल्मी स्टाइल में हुए पर्दापण ने न केवल सबको हैरान कर दिया, बल्कि पुलिस द्वारा अपनी खाल बचाने हेतु किए गए हत्या की गुत्थी सुझलाने के झूठे दावें का भी पर्दाफाश कर दिया।
दरअसल हुआ यूं कि बी.बी.ए. के छात्र अजीत सैनी व अंशु तोमर के बीच प्रेम प्रसंग चल रहा था। चूंकि दोनों की जातियां अलग-अलग थी इसलिए लड़के के घरवालों को यह रिश्ता मंजूर नहीं था। लिहाजा दोनों18 अप्रैल को घर से फरार हो गये थे, और एक रात गायब रहने के बाद दोनों 19 अप्रैल को वापस घर पर आ गये थे। बाद में दोनों के परिजनों में शादी को लेकर कोई सहमती हुई और लड़की को उसके घर भेज दिया गया एवं लड़का अपने घर पर था। 29 अप्रैल को पुणे के लिए निकला अजित जब वहां नहीं पहुंचा तो घर वालों को फिक्र हुई। इस दौरान विगत 6 मई को एक फार्म हाउस से गर्दन और पैर कटी लाश मिली, जिसकी लड़के के चाचा राम किशोर ने अजित के रूप में शिनाख्त कर ली और उसकी शिकायत पर पुलिस ने अंशु के भाई अनुज और पिता नरेन्द्र को हिरासत में ले लिया। कुछ देर बाद पुलिस ने 'धमाकाÓ किया-'अनुज ने अजित सैनी का कत्ल करना स्वीकार कर लिया है और उनकी निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त छुर्री भी बरामद कर ली है। यह बात पुलिस ने उनसे कैमरों के सामने भी कबूलवाई। ऑनर किलिंग जैसे संवेदनशील खुलासे के बाद देशभर का मीडिया सक्रिय हो गया। इस बीच एक समाचारपत्र में प्रेमी की हत्या के आरोप में पिता व भाई को जेल जाता देख अंशु से रहा नहीं गया। वह अपने प्रेमी को लेकर थाने पहुंच गई। प्रेमी युगल को जिंदा लौटा देख पुलिस के हाथ-पांव फूल गए और उन्होंने दोनों को हिरासत में लेकर अपने तरीके से पट्टी पढ़ानी शुरू कर दी और मीडिया से दोनों को दूर कर दिया गया। दोनों प्रेमी दिल्ली और हरिद्वार में लगभग नौ दिन बिताने के बाद बिजनौर पहुंचे थे। यहीं अखबार में अपनी मौत की खबर पढऩे के बाद अजित ने अपने चाचा से सम्पर्क किया और अपने जींदा होने की सूचना उन्हें दी। उसके बाद पौने चार बजे के करीब दोनों मंडी थाने पहुंच गये। बताया जाता है कि लाश मिलने के बाद पुलिस ने गहराई से छानबीन नहीं की और अजित की हत्या के आरोप में लड़की के पिता नरेंद्र और भाई अनुज तोमर को थाने ले आई। जल्दी केस निपटाने के मूड में पुलिस ने सबसे पहले अपराध कबूलवाने पर अपना ध्यान केंद्रित किया। अनुज से जबरदस्ती अपराध कबूलवा कर पुलिस संतुष्ट होकर बैठ गई थी, परन्तु अचानक अंशु के अजित के साथ थाने पर पहुंच गए और पुलिस द्वारा रची झूठी कहानी जगजाहिर हो गई। अंशु व अजित के थाने पहुंचने की खबर पर मीडिया के लोग थाने में जमा हो गए, लेकिन पुलिस ने प्रेमी युगल को अपने कब्जे में लेकर किसी से भी बात नहीं करने दी।
हद तो तब हो गई जब अगले ही दिन पुलिस ने अजित और उसके परिजनों के खिलाफ मामला दर्ज किया। पुलिस के मुताबिक लड़की के घरवालों की शिकायत पर जिले के नई मंडी थाने में उसके प्रेमी अजित सैनी (23) के खिलाफ बहला फुसलाकर लड़की को भगाने जबकि उसके पिता और चाचा के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया। इस सम्पूर्ण मामले में यह साबित हो गया कि हिंदुस्तानी पुलिस हत्या की गुत्थी सुलझाने के लिए निर्दोष को भी बली का बकरा बनाने में संकोच नहीं करती।

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