14 साल में संतराम सैनी को 60 बार डस चुके हैं सांप
राजेन्द्र सैनी
समाचार सम्पादक
हांसी। वह सांपों के डर से पिंजरे में रहता है। सांपों ने उसकी जिंदगी को नरक बनाकर रख दिया है। डर के साये में जी रहे संतराम को सांप करीब 60 बार डस चुके हैं। कमाल की बात तो यह है कि सांपों ने उसके परिवार के किसी सदस्य को अब तक कोई नुकसान नहीं पहुंचाया है। हांसी में गांव ढाणी मार्ग पर नहर पुल के समीन रहने वाला संतराम सैनी यह यातना 14 सालों से झेल रहा है। संतराम को भी ठीक से याद नहीं है कि फन उठाए व लपलपाती जीभ वाले जहरीले सांप उसे कितनी बार डस चुके हैं। लेकिन पिछले 14 सालों में कम से कम 60 बार सांप उसे डस चुके हैं।
कभी रोहतक के महम कस्बे में रहने वाला 55 वर्षीय संतराम करीब एक दशक पहले खेती के सिलसिले में हांसी आया था। उसने यहां रजवाहे वाली भूमि ठेके पर लेकर काश्त करनी शुरू की और खेत में ही अपना डेरा बनाकर परिवार सहित रहने लगा। एक दिन वह अपने पड़ोसी किसान के साथ खेत में पानी देने की तैयारी कर रहा था कि अचानक कहीं से एक सांप आया और उसे डसकर झाडिय़ों में गायब हो गया। घबराया संतराम डेरे पहुंचा और वहां चारपाई पर बेसुध होकर गिर पड़ा।
परिवार के लोगों ने तुरंत झाड़-फूंक व देसी दवाई की व्यवस्था की। इससे उसकी जान तो बच गई, लेकिन इसके बाद से ही उसके बुरे दिन शुरू हो गये। उसी दिन शाम एक सांप को संतराम के डेरे पर देख किसानों ने उसे लाठियों से मार दिया। इस घटना को अभी थोड़ी देर ही हुई थी कि वहां एक सांप और आ पहुंचा। लोगों ने उसका भी पीछा किया और उसे भी मौत की नींद सुला दिया। जैसे-जैसे अंधेरा गहराता गया, संतराम के डेरे पर सांप ही सांप मंडराने लगते। सपेरे को भी बुलाया गया लेकिन इसके बावजूद सांप डेरे पर रेंगते रहे। यह सिलसिला करीब दो साल तक चलता रहा। थक-हार कर परिजनों व गांव वालों ने उसके लिए लकड़ी व लोहे की जाली का पिंजरा बनवाया। तब से वह इस पिंजरे में ही रहता है। पिंजरे में साने से वह रात को तो सांपों के हमले से बच जाता है लेकिन उससे बाहर निकलते ही सांप उस पर हमला कर देते हैं। संतराम ने बताया कि मसूदपुर में स्थित सालाडेरी के बाबा से औषधि ली थी इसलिए सांपों द्वारा काटे जाने के बावजूद वह आज भी जीवित है। लोगों का कहना है कि संतराम चाहे भीड़ में भी खड़ा हो सांप केवल उसे ही शिकार बनाते हैं । सपेरों का मानना है कि संतराम के शरीर में सांपों द्वारा बार-बार डसने के कारण ऐसी गंध समा चुकी है जिसे संूघ कर सांप उसकी तरफ दौड़े चले आते हैं। संतरात की भी सूंघने की शक्ति इतनी तेज हो चुकी है कि उसे भी दूर से यह पता चल जाता है कि उसके आसपास कोई सांप मंडरा रहा है। वह अब हर समय अपने पास लाठी रखता है। उसने बताया कि वह अब तक करीब तीन दर्जन सांपों का फन कुचल चुका है। संतराम की पत्नी का कहना है कि सांपों ने उनकी जिंदगी को नरक बना दिया है।
बुधवार, नवंबर 03, 2010
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Chander Prakash ji
जवाब देंहटाएंHindustan akhbar me aapke blog ke baare me ek senior journlist ne jo likha hai uske liye badhayi aur bhavisya ke liye shubkamnaye. Mujhe es baat ki gehrayi se khusi hai ki aapke saini sanvaad ke madhyam se kam se kam saini samaj par charch to huyi aur bhi ek national news paper me. mai bhi aapke regular paathak banana chahta hun eske liye mujhe kya karna padega