शनिवार, नवंबर 27, 2010

सैनी एजूकेशन सोसायटी का एतिहासिक कदम

सैनी शॉपिंग कॉम्पलैक्स की आधारशिला रखते प्रधान विजय सैनी व अन्य पदाधिकारीगण। सैनी संवाद



सैनी मार्किट का किया शिलान्यास

महेन्द्र तोंदवाल
कार्यकारी सम्पादक

रोहतक। सैनी एजूकेशन सोसायटी के इतिहास में विगत 10 अक्तूबर को एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया। इस दिन न केवल स्थानीय गोहाना अड्डा पर बनाये जाने वाले सैनी एजूकेशन सोसायटी शॉपिंग कॉम्पलैक्स की आधारशिला रखी गई, बल्कि सैनी समाज के मौजीज लोगों ने सोसायटी पदाधिकारियों की पीठ थपथपा कर इस प्रोजेक्ट को सोसायटी के इतिहास में मील का पत्थर साबित होने की बात भी कही। उनका कहना था कि इस शॉपिंग कॉम्पलैक्स के बनने से शहरवासियों में सैनी एजूकेशन सोसायटी की एक विशेष पहचान बनेगी, जो इसकी प्रतिष्ठा में चार चांद लगाने में अहम भूमिका अदा करेगी।
इससे पूर्व, शॉपिंग कॉम्पलैक्स की आधारशिला सोसायटी के प्रधान विजय सैनी ने सुबह दस बजकर दस मिनट दस सैकेंड पर रखी। इस अवसर पर अपने सम्बोधन में विजय सैनी ने कहा कि पांच साल पूर्व जब उनकी युवा मैनेजमैंट ने सैनी सोसायटी की बागडोर संभाली थी तभी से इस शॉपिंग काम्पलैक्स का निर्माण करने के लिए प्रयास किये जा रहे थे। चूंकि इस काम में कई तकनीकी पेच अटके हुए थे इसलिए उनकी मैनेजमैंट को यह काम सिरे चढ़ाने में 5 सालों का लम्बा समय लग गया। मगर उन्हें इस बात की खुशी है कि वे अपनी इस योजना को साकार करने में कामयाब हो गये। सचिव सतपाल सैनी व कोषाध्यक्ष रोहतास आर्य ने बताया कि चार मंजिली बनाये जाने वाले इस अत्याधुनिक शॉपिंग कॉम्पलैक्स में करीब दो दर्जन दुकानें होंगी। इस अवसर पर सोसायटी के पूर्व प्रधान प्रेम सिंह व बाबू मामन सिंह, पूर्व प्रबंधक बालकिशन सैनी, कंवल सिंह, रामनारायण सैनी, उपप्रधान महिपाल सैनी, सहसचिव सुभाष सैनी, वरिष्ठ इनेलो नेता राजेश सैनी, प्रबंधक रामेश्वर सैनी, सूरजभान सैनी, किशन सिंह, जिले सिंह बागड़ी, सुरेश सैनी, राजेंद्र सैनी, विनोद सैनी, डा. मोहर सिंह, दलबीर, हरि किशन, दयाचंद सैनी, लक्ष्मी नारायण, देवी सिंह, नवीन, शमशेर सिंह, महेंद्र सैनी, सतबीर, जोगेंद्र, फूल कुमार, ईश्वर रोजला, कर्ण सिंह, जीवन सैनी, अजमेर सिंह, अतर सिंह, ओमप्रकाश, अशोक सैनी आदि मौजूद थे।

बुधवार, नवंबर 03, 2010

सांप के डर से पिंजरे में रहने को मजबूर एक शख्स

14 साल में संतराम सैनी को 60 बार डस चुके हैं सांप

राजेन्द्र सैनी
समाचार सम्पादक

हांसी। वह सांपों के डर से पिंजरे में रहता है। सांपों ने उसकी जिंदगी को नरक बनाकर रख दिया है। डर के साये में जी रहे संतराम को सांप करीब 60 बार डस चुके हैं। कमाल की बात तो यह है कि सांपों ने उसके परिवार के किसी सदस्य को अब तक कोई नुकसान नहीं पहुंचाया है। हांसी में गांव ढाणी मार्ग पर नहर पुल के समीन रहने वाला संतराम सैनी यह यातना 14 सालों से झेल रहा है। संतराम को भी ठीक से याद नहीं है कि फन उठाए व लपलपाती जीभ वाले जहरीले सांप उसे कितनी बार डस चुके हैं। लेकिन पिछले 14 सालों में कम से कम 60 बार सांप उसे डस चुके हैं।
कभी रोहतक के महम कस्बे में रहने वाला 55 वर्षीय संतराम करीब एक दशक पहले खेती के सिलसिले में हांसी आया था। उसने यहां रजवाहे वाली भूमि ठेके पर लेकर काश्त करनी शुरू की और खेत में ही अपना डेरा बनाकर परिवार सहित रहने लगा। एक दिन वह अपने पड़ोसी किसान के साथ खेत में पानी देने की तैयारी कर रहा था कि अचानक कहीं से एक सांप आया और उसे डसकर झाडिय़ों में गायब हो गया। घबराया संतराम डेरे पहुंचा और वहां चारपाई पर बेसुध होकर गिर पड़ा।
परिवार के लोगों ने तुरंत झाड़-फूंक व देसी दवाई की व्यवस्था की। इससे उसकी जान तो बच गई, लेकिन इसके बाद से ही उसके बुरे दिन शुरू हो गये। उसी दिन शाम एक सांप को संतराम के डेरे पर देख किसानों ने उसे लाठियों से मार दिया। इस घटना को अभी थोड़ी देर ही हुई थी कि वहां एक सांप और आ पहुंचा। लोगों ने उसका भी पीछा किया और उसे भी मौत की नींद सुला दिया। जैसे-जैसे अंधेरा गहराता गया, संतराम के डेरे पर सांप ही सांप मंडराने लगते। सपेरे को भी बुलाया गया लेकिन इसके बावजूद सांप डेरे पर रेंगते रहे। यह सिलसिला करीब दो साल तक चलता रहा। थक-हार कर परिजनों व गांव वालों ने उसके लिए लकड़ी व लोहे की जाली का पिंजरा बनवाया। तब से वह इस पिंजरे में ही रहता है। पिंजरे में साने से वह रात को तो सांपों के हमले से बच जाता है लेकिन उससे बाहर निकलते ही सांप उस पर हमला कर देते हैं। संतराम ने बताया कि मसूदपुर में स्थित सालाडेरी के बाबा से औषधि ली थी इसलिए सांपों द्वारा काटे जाने के बावजूद वह आज भी जीवित है। लोगों का कहना है कि संतराम चाहे भीड़ में भी खड़ा हो सांप केवल उसे ही शिकार बनाते हैं । सपेरों का मानना है कि संतराम के शरीर में सांपों द्वारा बार-बार डसने के कारण ऐसी गंध समा चुकी है जिसे संूघ कर सांप उसकी तरफ दौड़े चले आते हैं। संतरात की भी सूंघने की शक्ति इतनी तेज हो चुकी है कि उसे भी दूर से यह पता चल जाता है कि उसके आसपास कोई सांप मंडरा रहा है। वह अब हर समय अपने पास लाठी रखता है। उसने बताया कि वह अब तक करीब तीन दर्जन सांपों का फन कुचल चुका है। संतराम की पत्नी का कहना है कि सांपों ने उनकी जिंदगी को नरक बना दिया है।

पूर्व मेयर के दबाव में रवि सैनी ने किया आत्मदाह

अमृतसर। स्थानीय सेलीब्रेशन माल के निकट चाय की रेहड़ी लगाने वाले एक युवक रवि सैनी ने पूर्व मेयर सुनील दत्ती की धमकियों से तंग आकर खुद पर तेल डालकर आत्मदाह कर लिया। दरअसल 30 वर्ष पहले रवि सैनी के पिता करतार सिंह की टेक्सटाइल मिल में नौकरी करते थे। उनके पिता के कामकाज से खुश होकर करतार सिंह ने उन्हें बटाला रोड पर गगन सिनेमा के नजदीक एक प्लाट दे दिया था। इस प्लाट की वसीयत भी उनके पिता के नाम पर कर दी गई थी और वह पिछले पंद्रह वर्ष से इस प्लाट में ही रह रहा है। करतार सिंह की मौत के बाद अब उनका बेटा सर्बजीत सिंह बब्बर उनसे यह प्लाट जबरदस्ती खाली करवाना चाहता था। इंकार करने पर सर्बजीत सिंह पूर्व मेयर सुनील दत्ती, सोनू दत्ती और अन्य लोगों के साथ मिलकर उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां दे रहा था। इन्हीं धमकियों से तंग आकर रवि ने खुद पर मिट्टी का तेल डालकर आत्मदाह का प्रयास किया, उसे झुलसी हालत में अस्पताल में दाखिल करवाया गया। जहां उसने दम तोड़ दिया। थाना रामबाग के एस.एच.ओ. दिनेश सिंह ने बताया कि पूर्व मेयर सुनील दत्ती और अन्य आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 306 के तहत मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी गई है।

28 नवम्बर को समाज सुधारक महात्मा ज्योति बा फूले की पुण्य तिथि पर विशेष

महान क्रांतिकारी व प्रेरणा स्त्रोत थे ज्योति बा फूले

चन्द्रप्रकाश सैनी
प्रधान सम्पादक

इसमें कोई दो राय नहीं है कि महात्मा ज्योति राव फूले को 19वीं शताब्दी में महाराष्ट्र में हुए समाज सुधारकों में एक विशेष दर्जा प्राप्त है क्योंकि जहां दूसरे समाज सुधारकों ने परिवार व विवाह की समाजिक स्वीकृति एवं मान्यता से सम्बंधित महिलाओं के अधिकारों पर अपना ध्यान केंद्रीत रखा, वहीं ज्योति राव ने शैक्षणिक प्रणाली में अमूल-चूल बदलाव के साथ-साथ समाज में व्याप्त उस जातीय भेदभाव को भी जड़ मूल से खत्म करने के लिए संजीदा प्रयास किये, जिसका दंश उस समय खासतौर पर दबी-कुचली जातियों के लाखों लोगों को भुगतना पड़ रहा था। उनके द्वारा इन दो क्षेत्रों में किये गये अथाह प्रयासों का ही प्रतिफल था कि वे जहां शिक्षा को पिछड़ों व निम्र जातियों के लोगोंं विशेषकर गरीब महिलाओं तक पहुंचाने में कामयाब रहे, वहीं उन्होंने तर्कसंगत दलीलें देने के साथ-साथ अनेक व्यवहारिक कदम भी उठाकर ऊंची व नीची जातियों के बीच उत्पन्न भेदभाव की खाई को भी काफी हद तक पाटने का काम किया। यही वजह है कि उन्हें आज भी मैन ऑफ राइटस की संज्ञा दी जाती है।

कठिनाइयों में गुजरा बचपन
ज्योति बा फूले का जन्म 11 अप्रैल 1827 को महाराष्ट्र के सतारा जिले के एक गरीब परिवार में हुआ था। उनके पिता गोविंदराम फूले, जो कि मूल रूप से पूना के रहने वाले थे, सब्जी बेचकर अपने व अपने परिवार को गुजर बसर करते थे। ज्योति बा के दादा जी व उनके दो चाचा पूना में फूल का काम किया करते थे और तभी से इनके नाम के आगे फूले शब्द जुड़ गया था।
ज्योति बा का बचपन बड़ी परेशानियों में गुजरा था और वे जब कुछ ही महीनों के थे तो उनके सिर से मां का साया उठ गया था। चूंकि ज्योति राव के परिवार की आर्थिक हालत ठीक नहीं थी इसलिए खेती व बागवानी में अपने पिता का हाथ बंटाने के लिए उन्हें प्राथमिक शिक्षा के बाद ही मजबूरीवश स्कूल छोडऩा पड़ा था और महज 13 साल की उम्र में ही ज्योति बा की शादी तय कर दी गई थी। ज्योति बा शुरूआत से ही होशियार व ज्ञानशील थे इसी वजह से उनके दो पड़ोसियों, जिनमें से एक मुस्लिम व एक ईसाई था, ने गोविंद राव को उन्हें आगे पढ़ाने के लिए जैसे-तैसे राजी कर लिया था। तभी ज्योति बा के जीवन में एक नया मोड आया और उन्होंने वर्ष 1841 में पूना के स्कोटिस मिशनस हाई स्कूल में दाखिला ले लिया। यहीं पर उनकी ब्राह्मण समाज के छात्र सदाशिव बलाल गोवंदे से मुलाकात व दोस्ती हुई, जो कि उनके साथ नि:स्वार्थ भाव से ताउम्र चलती रही। मोरो विठाल वालवेकर व शेखराम यशवंत परांजपे दो अन्य ऐसे ब्राह्मण मित्र थे, जिन्होंने ज्योति बा द्वारा चलाई गई सभी गतिविधियों में बढ़चढ़ कर न केवल उनका सहयोग दिया, बल्कि उन्हें कामयाब बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। वर्ष 1847 में ज्योति बा ने अपनी सैकेंडरी की पढ़ाई पूरी की तथा यह कहते हुए सरकारी नौकरी करने से इंकार कर दिया कि वे अपना जीवन समाज में फैली अस्पृश्यता एवं अराजकता को दूर करने तथा शिक्षा को धरातल तक पहुंचाने में समर्पित करेंगे।

यूं मिली समाज सुधार की प्रेरणा
जातीय भेदभाव को दूर करने की प्रेरणा ज्योति राव को वर्ष 1848 में उनके साथ हुई एक घटना के बाद मिली। दरअसल ज्योति राव के ब्राह्मण मित्रों ने उन्हें एक ब्राह्मण की शादी में आमंत्रित किया था। ज्योति राव भी अपने मित्रों के साथ बारात में शामिल हुए और फेरे के वक्त जैसे ही दुल्हा मंडप पर जाने लगा तो दुल्हे के रिश्तेदारों ने ज्योति राव को यह कहते हुए दुल्हे से दूर कर दिया कि वे पिछड़ी जाति सैनी से संबंध रखते है। यह बात ज्योति राव को काफी महसूस हुई और वे आंखों में आंसू लिये उस शादी से वापस घर लौट आये तथा उन्होंने इस घटनाक्रम से अपने पिता को अवगत करवाया। इस घटना के बाद ही ज्योति राव ने समाज में पिछड़ी व निम्र जातियों के साथ होने वाले भेदभाव को दूर करने का प्रण लिया और पिछड़ी व निम्र जातियों को उनका हक दिलवाने की दिशा में काम करना शुरू कर दिया। यही से ही ज्योति राव के समाज सुधार आंदोलन की शुरूआत मानी जाती है।

दबे-कुचलो को की शिक्षा प्रदान
ज्योति राव का मानना था कि महिलाओं तथा पिछड़ी व निम्र जातियों को बढ़ावा देने के लिए शिक्षा की जरूरत सबसे ज्यादा इन्हीं को है। इसलिए सबसे पहले उन्होंने अपनी अनपढ़ पत्नी सावित्री बाई को पढ़ाना शुरू किया और फिर अगस्त 1848 में एक गल्र्ज स्कूल की स्थापना की। ज्योति राव की यह मुहिम उनके विरोधी लोगों का रास नहीं आई और उन्होंने ऊंची जाति के किसी भी शिक्षक को उस स्कूल में जाने नहीं दिया। ऐसा होने के बावजूद ज्योति राव ने हिम्मत नहीं हारी और उन्होंने अपनी पत्नी सावित्री बाई को ही निम्र जातियों की लड़कियों को पढ़ाने के लिए कह दिया। यह भी उनके विरोधियों को नागवार साबित हुआ और उन्होंने ज्योति राव व उनकी पत्नी पर पत्थर फैंकने शुरू कर दिये। जब इससे भी बात नहीं बनी तो उन्होंने ज्योति राव के पिता को उनकी गतिविधियों को रोकने अन्यथा इन्हें घर से निकालने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया। यही वजह थी कि ज्योति राव व उनकी पत्नी को मजबूरन अपना घर छोडऩा पड़ा मगर उन्होंने स्कूल को बंद नहीं किया।
चूंकि सभी लड़कियों को नि:शुल्क शिक्षा प्रदान की जा रही थी इसलिए पैसों के अभाव में कुछ समय बाद यह स्कूल बंद हो गया। मगर ज्योति राव ने हिम्मत नहीं हारी और कुछ समय बाद अपने दो ब्राह्मण दोस्तों- गोवंदे व वालवेकर- की मदद से 3 जुलाई 1851 में निम्र व पिछड़ी जातियों की लड़कियों को शिक्षा देने के लिए फिर से स्कूल शुरू कर दिया। इसके कुछ समय बाद ही ज्योति राव ने समीपवर्ती इलाकों में भी दो अन्य स्कूल खोल दिये। उस समय तत्कालीन ब्रिट्रिश सरकार द्वारा शिक्षा का अधिकतम बजट उच्चतर शिक्षा पर खर्च किया जाता था और प्राथमिक शिक्षा के लिए यह राशि कम रखी गई थी। ज्योति राव ने अपनी दलीलों से ब्रिट्रिश सरकार को प्राथमिक शिक्षा के महत्व से अवगत करवाया और उन्हें प्राथमिक शिक्षा पर उच्चतर शिक्षा के अनुरूप से बजट खर्च का प्रावधान करने के लिए मजबूर किया।

विधवा विवाह का किया सूत्रपात
ज्योति राव के काल में हिंदू सोसायटी की ऊंची जातियों में न केवल विधवा विवाह पूरी तरह से प्रतिबंधित था, बल्कि बाल विवाह का भी जबरदस्त प्रचलन था। यही वजह थी कि अनेक ऐसी महिलाओं को अपना जीवन जीने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था जो कि अपने यौवन काल में ही विधवा हो गई थी। ऐसी स्थिति में अनेक महिलाओं के अवैध सम्बंध भी हुए और इससे जन्मी संतानों को उन्होंने लोक लाज के भय से या तो गलियों में छोड़ दिया या फिर जन्म से पूर्व ही कोख में उनकी हत्या कर दी। समाज में चल रही इस प्रथा से ज्योति राव काफी आहत थे इसलिए उन्होंने अनाथालय की स्थापना कर दी। जहां पर ज्योति राव ने गर्भवती महिलाओं को सुरक्षा प्रदान की और उन्हें यह भरोसा दिलवाया कि उनके बच्चों का लालन-पालन इस अनाथालय में भलीभांति किया जायेगा। यही वजह थी कि वर्ष 1873 में एक ब्राह्मण विधवा ने इस अनाथालय में एक पुत्र को जन्म दिया, जिसे बाद में ज्योति राव ने गोद लेकर उसका पालन-पोषण किया।

सत्य शोधक समाज का गठन
ज्योति राव फूले ने निम्र व पिछड़ी जातियों को उनके अधिकार दिलवाने के लिए 24 सितम्बर 1873 में अपने समर्थकों की एक बैठक कर सत्य शोधक समाज का गठन किया। ज्योति राव इसके संस्थापक अध्यक्ष व कोषाध्यक्ष थे। सत्य शोधक समाज का गठन शूद्रों व दलितों को उनके अधिकार दिलवाने के साथ-साथ एक जाति विशेष द्वारा उन पर ढहाये जा रहे सितम पर भी अंकुश लगाना था। ज्योति राव ने इस संगठन की मैम्बरशिप सभी बिरादरियों के लोगों के लिए ओपन की थी जिस वजह से कुछ ही समय में इसके 316 सदस्य बन गये थे। इसके बाद ज्योति राव ने सार्वजनिक धर्मा पुस्तक प्रकाशित की, जिसमें उन्होंने पुरुषों व महिलाओं के समान अधिकारों की वकालत करते हुए समाज से महिलाओं पर लगाये गये अनेक फिजूल एवं बेतुके सामाजिक बंधनों का हटाने का आह्वान किया।

विक्टोरिया अनाथालय का गठन
वर्ष 1876 में ज्योति राव को पूना नगर पालिका का नामांकित सदस्य नियुक्त किया गया था। जहां उन्होंने भूखमरी के चलते गांव छोड़ रहे महाराष्ट्र के विभिन्न इलाकों के लोगों की पूरजोर मदद करने का प्रयास किया क्योंकि भूखमरी के चलते महाराष्ट्र के विभिन्न इलाकों के लोग न केवल पलायन कर रहे थे बल्कि अपने बच्चों को भी लावारिश छोडऩे पर मजबूर थे। ऐसी स्थिति में ज्योति राव ने सत्य शोधक समाज के अंतर्गत विक्टोरिया अनाथालय खोलने का निर्णय लेते हुए इसे कुशलतापूर्वक क्रियान्वित किया। इस काम में उनके ब्राह्मण मित्रों ने भी उनका भरपूर सहयोग दिया, जिसके चलते ज्योति राव काफी संख्या में बेसहारा लोगों व बच्चों की सुरक्षा व उनकी मदद करने में कामयाब रहे।

जीवन की अंतिम सांस तक चलता रही अधिकारों की लड़ाई
दबे-कुचलों को उनका हक दिलवाने तथा उन्हें शिक्षा ग्रहण करने के प्रति उत्साहित करने एवं इसके लिए माहौल तैयार करने हेतु ज्योति राव फूले द्वारा जवानी में छेड़ा गया संघर्ष उनकी जीवन की अंतिम सांसों तक चलता रहा। बात चाहे अछूतों को मुख्य धारा में शामिल करवाने के लिए अपने घर के नजदीक बाथिंग टैंक बनाने की हो या फिर एक जाति विशेष के विरोध के बावजूद अपने स्तर पर स्कूल खोलकर महिलाओं को शिक्षा प्रदान करने की और या फिर शूद्रों का जीवन नरक बनाने वाली जातियों की सार्वजनिक मंचों पर खिलाफत कर उन्हें अपनी सोच बदलने के लिए मजबूर करने की ही क्यों न हो, ज्योति राव फूले ने हर मामले में अपनी आवाज को मुखर किया और विकट परिस्थितियों में भी हौंसला न खोते हुए एक दंबगई से दबे-कुचलों के अधिकारों की लड़ाई लड़ी। 28 नवम्बर 189० को इस महान शख्सियत का स्वर्गवास हो गया।

सैनी जौहरियों के ब्लाइंड मर्डर का पर्दाफाश

डायमंड की खातिर की गई थी सैनी जौहरियों की हत्या

विनोद सैनी
हमारे संवाददाता

बीकानेर। जयपुर के तीन सैनी जौहरियों के ब्लाइंड मर्डर का पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। हत्यारे कोई नहीं, बल्कि तीन भाई थे, जिन्होंने डायमंड की खातिर ही इन हत्याओं को अंजाम दिया। इनमें दो सगे व तीसरा फुफेरा भाई है। पुलिस ने इनसे पास से लाखों रुपए के डायमंड पोलकी भी बरामद कर लिए हैं। तीनों की मोबाइल फोन की कॉल डिटेल ने पुलिस का काम आसान कर दिया। पुलिस महानिरीक्षक दलपत सिंह दिनकर ने बताया कि जयपुर निवासी चाचा-भतीजे जौहरी सूरज सैनी व मुकेश सैनी तथा शैलेष गुजराती की हत्या के आरोप में सरदारशहर निवासी दीनदयाल सोनी उर्फ दिनेश तथा इसके सगे भाई दिलीप सोनी व बुआ के लड़के मोमासर निवासी गजानंद सोनी को गिरफ्तार किया गया है। दिनकर ने बताया कि तीनों जौहरी सरदार शहर में आभूषण व्यवसायियों को डायमंड सप्लाई करते थे। यहां के कई सुनार यह जानते थे कि ये तीनों लाखों रुपए के डायमंड ले कर आते हैं। इन्हीं में से एक दीनदयाल सोनी ने अपने सगे भाई के साथ मिल कर इनकी हत्या का षडय़ंत्र रचा। सोनी ने इनसे जान-पहचान भी बढ़ा ली थी। इसकी पुष्टि उनके मोबाइल फोन की कॉल डिटेल से भी हुई है । विगत 24 सितम्बर को तीनों जौहरी अपना माल बेचने सरदार शहर आए थे व दो दिन के लिए शांति पैलेस होटल में ठहरे थे। इधर दीनदयाल भी सतर्क हो गया था। उसने अपने एक मित्र से राईनो कार ली और तीनों को दोपहर करीब अढ़ाई बजे अपने घर ले गया। जहां तीनों को कॉफी पिलाई गई। कॉफी दीनदयाल के भाई दिलीप सोनी ने बनाई व इसमें नशे की गोलियां पीसकर मिला दी। जब ये सभी कॉफी पी रहे थे तब दीनदयाल ने सूरज से माल दिखाने के लिए कहा। इस पर शैलेष ने अपने शर्ट से चैन लगी प्लास्टिक की थैली खोल कर पोटली में रखे डायमंड दिखाए। थोड़ी देर बाद ही नशा अधिक होने के कारण तीनों वहीं अचेत होकर गद्दे पर गिर पड़े। उनमें से शैलेष की अधिक नशे के कारण मृत्यु हो गई जबकि सूरज व मुकेश की सांसें चल रही थी। इसलिए आरोपियों ने उनकी गला घोंटकर हत्या कर दी। रात करीब दो बजे वे तीनों की लाशों को ठिकाने लगाने के लिए रवाना हुए। तब इन्होंने फुफेरे भाई गजानंद सोनी को भी साथ ले लिया। अलग-अलग स्थानों पर लाशों को फेंक कर उनके चार मोबाइल फोन गिड़गिचीया रोड पर सड़क किनारे घास फूस डालकर जला दिए। ये मोबाइल अर्धजली अवस्था में पुलिस ने बरामद कर लिए है। बाद में इन्होंने कार को धुलवाया व वापस पातलीसर निवासी अपने दोस्त को लौटा दिया। पुलिस ने जब मृतकों की काल डिटेल कर जांच शुरू की तो हत्या का खुलासा होने में देर नहीं लगी।

630 रोगियों के स्वास्थ्य की नि:शुल्क जांच की

सुरेश सैनी

भिवानी। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी व लाल बहादुर शास्त्री के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में विगत 3 अक्तूबर को सैनी कल्याण परिषद के तत्वावधान में हनुमान ढाणी स्थित राजकीय उच्च विद्यालय में नि:शुल्क मैडिकल कैम्प का आयोजन किया गया। जिसमें भिवानी के चिकित्सक डा. जे.बी. गुप्ता, डा. मनोज वर्मा, डा. अनिल चौधरी, डा. मोनिका गर्ग, डा. महेंद्र जायसवाल तथा डा. सुनीता ने कैम्प में आये 63० रोगियों के स्वास्थ्य जांच की। कार्यक्रम के मुख्यातिथि विधायक घनश्याम दास सर्राफ थे जबकि अध्यक्षता परमानंद सैनी ने की। प्रधान ओमप्रकाश सैनी ने बताया कि उनकी संस्था सैनी कल्याण परिषद समय-समय पर मैडिकल कैम्प का आयोजन कर लोगों के स्वास्थ्य की जांच करवाती रहती है। उन्होंने बताया कि आगामी 19 दिसम्बर को महाराजा शूर सैनी जयंति के उपलक्ष्य में सैनी कल्याण परिषद के तत्वावधान में एक ब्लड कैम्प का आयोजन किया जायेगा। इस अवसर पर सीएमओ शिव कुमार, महंत चरणदास, प्रधान ओमप्रकाश सैनी, मा. मनोज कुमार, विजय कुमार, ललित ठेकेदार, बसंत, चिंरजी लाल सैनी, राजकुमार जमालपुरिया, मनोज सैनी, राकेश सैनी, राकेश बग्गीवाला, भीष्म सैनी, घीसाराम सैनी, राजकुमार सैनी, अजय सैनी, दयानंद सैनी एडवोकेट, रामपाल सैनी समेत सैनी समाज के अनेक गणमान्य लोग मौजूद थे।

नरेश सैनी की मौत पर मचा बवाल

महेन्द्रगढ़। स्थानीय राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के सामने महेन्द्रगढ़-नारनौल स्टेट हाइवे पर विगत 11 अक्तूबर की सुबह एक ट्रक की टक्कर से 18 वर्षीय छात्र नरेश सैनी की दर्दनाक मौत हो गई। दुर्घटना से गुस्साये छात्रों ने घटनास्थल पर जाम लगा दिया जो कि लगभग दो घंटे तक जारी रहा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सुबह लगभग दस बजे इसी महाविद्यालय में पढऩे वाला बीए द्वितीय वर्ष (दूरस्थ) का छात्र नरेश पुत्र परमानन्द सैनी वासी महेन्द्रगढ़ सड़क किनारे पैदल शहर की ओर आ रहा था कि इसी दौरान पीछे से आ रहे एक तेज रफ्तार ट्रक ने उसे जोरदार टक्कर मार दी। परिणामस्वरूप नरेश गंभीर रूप से घायल हो गया। साथी छात्रों ने तुरंत घायल नरेश को उपचार के लिये महेन्द्रगढ़ के सिविल अस्पताल पहुंचाया जहां से चिकित्सकों ने उसे पीजीआईएमएस रोहतक रैफर कर दिया। परिजन घायल नरेश को लेकर अभी नारनौल के पास ही पहुंचे थे कि उसने दम तोड़ दिया। वे उसे मुख्यालय नारनौल अस्पताल ले गये जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। दूसरी तरफ जाम खुलवाने मौके पर पहुंचे तहसीलदार व पुलिस बल ने छात्रों को काफी समझाया मगर छात्र अपनी जगह से न हिले। छात्रों का कहना था कि इस प्रकार की दुर्घटनाओं को रोकने के लिये वे पहले भी प्रशासन से मिलकर महाविद्यालय के सामने 3-4 स्पीड ब्रेकर बनाये जाने की मांग कर चुके हैं जिस पर जिला उपायुक्त ने उन्हें आश्वासन भी दिया था मगर उस पर अमल नहीं हुआ। आखिरकार लगभग दोपहर 12  बजे एसडीएम सतबीर सिंह जांगू ने मौका स्थल पर पहुंच कर छात्रों को तुरंत प्रभाव से ब्रेकर बनाये जाने की बात कह कर जाम खुलवाया।

चूहेदानी में फंसा अजगर

 डेराबस्सी (प्रेम सैनी) आदर्श नगर स्थित एक घर में विगत 18 अक्तूबर को एक अजगर का बच्चा चूहे का शिकार करते समय चूहेदानी में फंस गया। जानकारी के मुताबिक स्थानीय जीवन बीमा निगम कार्यालय के न•ादीक अशोक सैनी के घर में चूहा पकडऩे के लिए चूहेदानी लगी हुई थी कि शाम के वक्त चूहेदानी के खड़कने की आवाज तेज हो गई तो घर वालों ने सोचा कि चूहेदानी में कोई मोटा चूहा फंस गया है। जब उन्होंने चूहेदानी को देखा तो उनके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा क्योंकि चूहे का शिकार करने आया अजगर चूहेदानी में कैद हो गया था। चूहेदानी को डेराबस्सी के सरकारी कालेज की सड़क पर अजगर को बाहर छोडऩे के लिए ले जाया गया, जहां 5-6 फुट लंबाई के अजगर को देखने के लिए लोगों की भीड़ लग गई। चूहेदानी में लोहे का डंडा फंसाकर रास्ता बनाया गया। अजगर को रास्ता ढूंढऩे में 1०-15 मिनट लग गये तथा उसके बाद बाहर निकलते ही वह नजदीक जंगल में चला गया। यह घटना पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी रही।

कबूतरबाजी के आरोप में काबू

इस्माइलाबाद। आस्ट्रेलिया भेजने के नाम पर लाखों रुपए ठगने के मामले में पुलिस ने अनूप सैनी समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। साहब सिंह ने गत वर्ष पुलिस को शिकायत दी थी कि वह आस्ट्रेलिया जाना चाहता था। उसे अनूप सैनी व उसके दोस्तों नीरज कक्कड़ व नरेंद्र शर्मा ने आस्ट्रेलिया भेजने और वहां काम दिलवाने की बात कही। इसके लिए पांच लाख 5० हजार रुपए ले लिये और वे उसे आस्ट्रेलिया की बजाय थाइलैंड से वापस भारत ले आये।

सैनी कालेज में हुआ भगवत कथा का आयोजन

रोहतक (विनोद सैनी)। श्री राम श्री श्याम श्री बालाजी संकीर्तन सेवा मंडल के तत्वावधान में स्थानीय सैनी कालेज के खेल मैदान में विगत 8 से 14 अक्तूबर तक श्रीमद भगवत कथा का आयोजन किया गया। कथा का वाचन हरिद्वार से आये श्री श्री 1००8 महाराज शंकरानंद ने किया। इससे पूर्व 8 अक्तूबर को बैंड बाजे के साथ एक भव्य कलश यात्रा निकाली गई जो सैनी कालेज से शुरू होकर आकाशवाणी चौक से अम्बेडकर चौक होती हुई सोह्म मंदिर पहुंची और वहां से गंगा जल व महाराज अमरानंद का आशीर्वाद लेकर वापस सैनी कालेज के खेल मैदान में आकर सम्पन्न हुई। भगवत कथा में यजमान के तौर पर सैनी एजूकेशन सोसायटी के सचिव सतपाल सैनी, भाजपा नेता कंवल सिंह सैनी, संजय परमार आदि ने शिरकत की जबकि इस अवसर पर दिलबाग सैनी, रामेश्वर सैनी, अमित सैनी, राजेश सैनी, शकुंतला सैनी, जीत सैनी, उदय सैनी, विनोद सैनी व जिले सैनी ने व्यवस्था प्रबंधक का दायित्व निभाया।

सेना पेपर लीक मामले में कमांडर सैनी गिरफ्तार

मुंबई। सीबीआई ने सेना के क्लर्क पद की परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक प्रकरण में नौसेना के कमांडर आर.सी. सैनी को गिरफ्तार किया है। प्रश्नपत्र तैयार करने में शामिल रहे सैनी पर आरोप है कि उन्होंने कथित रूप से इस मामले में पहले से ही गिरफ्तार चार लोगों को वह मुहैया कराया था। ध्यान रहे सीबीआई के भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो ने प्रश्नपत्र लीक प्रकरण में विगत 26 सितंबर को कइयों के खिलाफ केस दर्ज किया था।

समाजसेवी पूर्ण सिंह सैनी का निधन

रोहतक (विनोद सैनी)। सैनी एजूकेशन सोसायटी के सचिव सतपाल सैनी के पिता समाजसेवी पूर्ण सिंह सैनी वासी चुन्नीपुरा का विगत 27 अक्तूबर की रात को निधन हो गया। वे 78 वर्ष के थे और अपने पीछे पत्नी, तीन पुत्र व छह पुत्रियां छोड़ गये। उनका अंतिम संस्कार सुखपुरा चौक स्थित शमशान घाट में हिंदु धर्म के मुताबिक किया गया। उनकी अंतिम यात्रा में सैनी समाज के अलावा शहर के गणमान्य लोगों ने हिस्सा लेकर परमपिता परमात्मा से दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।

निशा सैनी ने जीता नगद इनाम

झज्जर। गत माह यहां आयेाजित की गई सांझी प्रतियोगिता में झज्जर की निशा सैनी ने उम्दा प्रदर्शन करते हुए दूसरा स्थान हासिल किया। उन्हें मुख्यातिथि एसपी सौरभ सिंह ने 21 सौ रुपए का नगद पुरस्कार देकर सम्मानित किया।

इनेलो हलका प्रधान नियुक्त

रादौर। इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) नेता चरण सिंह सैनी, वासुदेव सैनी तथा कुलदीप सैनी पार्टी का हलका प्रधान नियुक्त किया गया है।

दीपक सैनी प्रैस सचिव बने

मंडी। स्थानीय पड्डल स्टेडियम दुकानदार संघ के गत माह हुए चुनावों में दीपक सैनी को प्रेस सचिव नियुक्त किया गया। इसके अलावा हितेंद्र सैनी को कार्यकारिणी का सदस्य बनाया गया।

तीन सैनी बंधुओं का अपहरण

गाजियाबाद। थाना किठौर के ग्राम अजराडा निवासी विजय सैनी के तीन पुत्र कृष्ण, अर्जुन व आका गत माह हापुड़ स्थित अपनी बहनों के यहां आए थे, जहां से वापस लौटते समय वे रहस्यमय ढंग से गायब हो गए। मामले में पीडि़त पिता ने अपने दोनों दामादों सहित नौ लोगों के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज करवाया है मगर अभी तक उनके बारे कोई सुराग नहीं लग पाया है।

विनोद सैनी उपप्रधान नियुक्त

करनाल। उपभोक्ता संरक्षण जनकल्याण समिति की हुई एक बैठक में सर्वसम्मति से विनोद सैनी को उपप्रधान नियुक्त किया गया।

अंजु सैनी बनीं समिति सदस्य

जीन्द। स्थानीय डी.आर.डी.ए हाल में उपायुक्त डा. अभय सिंह यादव की अध्यक्षता में हुई अलग-अलग बैठकों में वार्ड नंबर-29 से अंजु सैनी को सर्वसम्मति से जिला आयोजना समिति का सदस्य चुना गया।

संतोष सैनी सदस्य नियुक्त

भिवानी। जिला बाल कल्याण परिषद् द्वारा यहां आयोजित प्रश्रोत्तरी प्रतियोगिता में वैश्य मॉडल सीनियर सैकेंडरी स्कूल की अंकिता सैनी ने प्रथम स्थान प्राप्त कर स्कूल का नाम रोशन किया।

वुशू में कांस्य पदक जीता

कुरुक्षेत्र। लाडवा की शिवाला रामकुंडी परिसर में छत्रपाल खेल अकादमी द्वारा यहां आयोजित की गई प्रथम जिला वुशू अकादमी कप प्रतियोगिता में पुरुषों के जूनियर वर्ग में रोहित सैनी तथा महिला जूनियर वर्ग में काजल सैनी ने कांस्य पदक हासिल किया।

गोपीलाल सैनी सदस्य निर्वाचित

बूंदी। आयोजना समिति में शहरी क्षेत्र के सदस्यों के लिए हुए चुनाव में भाजपा पार्षद गोपीलाल सैनी जीत हासिल करने में कामयाब रहे।

जगदीश सैनी अध्यक्ष बने

सुंदरनगर। सुंदरनगर भाजपा मंडल की अध्यक्षा कमला ठाकुर ने जगदीश सैनी को भाजपा युवा मोर्चा पिछड़ा प्रकोष्ठï का अध्यक्ष नियुक्त किया है।

रविकांत सैनी ने पाया तीसरा स्थान

करनाल। एनडीआरआई में राजभाषा मास समारोह के तहत आयोजित की गई मसौदा लेखन प्रतियोगिता में रविंकांत सैनी ने तीसरा स्थान हासिल किया। जिसके लिए उन्हें 500 रुपए की नकद राशि से पुरस्कृत किया जाएगा।

इनेला नेता के दादा का निधन

बहादुरगढ़ (विनोद सैनी)। इनेलो के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य तथा बी.सी. प्रकोष्ठ के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष राम निवास सैनी के दादाजी मोहन लाल सैनी का विगत 9 अक्तूबर को निधन हो गया। वे 104 वर्ष के थे और अपने पीछे 7 लड़के, 21 पोते, 18 पड़ पोते छोड़ गये। उनकी सतरहवीं 24 अक्तूबर को नया गांव में सम्पन्न हुई, जिसमें इनेलो महासचिव व विधायक अजय चौटाला, पूर्व सांसद इंद्र सिंह, पूर्व विधायक नफे सिंह राठी, बाली पहलवान, सतपाल पहलवान, कर्नल कंवर सैनी, ठेकेदार चतर सैनी, मांगेराम सैनी, परमानंद सैनी, सज्जन सैनी, शेखर सैनी, मेजर सूबे सिंह सैनी आदि ने मुख्य रूप से शिरकत की।

राकेश सैनी बने चेयरमैन

कुरुक्षेत्र। युवा नेता राकेश सैनी को राजीव गांधी पंचायती राज संगठन का जिला चेयरमैन नियुक्त किया गया है। राकेश के नाम की घोषणा प्रदेश संयोजक भीम सिंह महेशवाला की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में की गई।