दहेज के लिए दो साल तक रखा कैद में
जयपुर। दरिंदगी ऐसी कि इंसानियत भी शर्म से पानी हो जाए। दहेज नहीं लाने पर पति ने पत्नी को दो-चार दिन नहीं, बल्कि दो साल तक कोठरी में बंद रखा। इसी में उसे खाना दिया जाता और अन्य दैनिक कार्य भी उसे यहीं करने पड़ते।
गंदगी से भरी कोठरी में बंधक बनाकर रखी गई उक्त महिला को जब उसके पीहर वालों ने आजाद कराया, तो कोठरी की हालत देखकर पुलिस भी सकते में आ गई। इस संबंध में महिला ने पति तथा ससुराल वालों के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। माचेड़ा शंकर कॉलोनी निवासी रेखा सैनी द्वारा पुलिस में दी गई शिकायत में कहा गया है कि उसकी शादी करीब छह साल पहले हुई थी। शादी के बाद से ही उसका पति रामरतन सैनी तथा परिवार के अन्य सदस्य दहेज के लिए प्रताडि़त करते थे। उसके दो बेटे रोहित (5) तथा राकेश (4) हैं।
दो साल पहले ससुराल वालों ने उसे पीहर से दहेज लाने के लिए प्रताडि़त करना शुरू कर दिया था। मना करने पर भी उसे बंधक बना दिया। कोठरी में उसे खाने-पीने का सामान देते। पीहर वाले मिलने के लिए आते तो मिलाने से मना कर देते। इस पर रेखा का भाई गोपाल सैनी परिवार के अन्य सदस्यों के साथ रेखा के ससुराल गया तथा उसे को कोठरी से बाहर निकाला। इसके बाद उसने हरमाड़ा थाने जाकर अपनी शिकायत दर्ज करवाई।
हरमाड़ा थाना पुलिस ने माचेड़ा पहुंंचकर कोठरी को देखा तो वह भी पसीज गई। बाद में पीडि़ता को पुलिस जीप से महिला थाना उत्तर पहुंचाया गया, जहां पर पीडि़ता ने पति व परिवार के अन्य लोगों के खिलाफ दहेज के लिए प्रताडि़त करने व बंधक बनाने का मामला दर्ज कराया।
समझौता कर साथ ले गया था घर
रेखा के भाई गोपाल ने बताया कि ससुराल वाले उसकी बहन को कई साल से प्रताडित कर रहे हैं। करीब तीन वर्ष पहले रेखा को पति ने बेरहमी से पीटा था। उस समय वह घर से भाग कर हरमाड़ा थाने पहुंची थी। पुलिस ने कार्रवाई शुरू की तो पति रामरतन ने लिखकर दिया था कि वह आगे से ऐसा नहीं करेगा।
...और फिर डाल दिया कोठरी में
मामला थाने पहुंचने के बाद ससुराल वालों का व्यवहार और खराब हो गया था। मारपीट कर रेखा को एक कमरे में बंद कर दिया गया। कमरे में रोशनी नहीं थी, बिजली का बोर्ड ही हटा हुआ था। जिस कमरे में उसे खाना दिया जाता, वहीं शौच करना होता था। महिला ने थाने में दी लिखित रिपोर्ट में बताया है कि उसे सात दिन तक शौचालय में बंद रखा गया। बार-बार ऐसी सजा देने की धमकी भी दी जाती थी।
साभार- राजस्थान पत्रिका, दैनिक भास्कर
सोमवार, मई 10, 2010
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