बुधवार, मई 12, 2010

सैनीपुरा के तीन बाशिंदों ने दायर की याचिका

कोर्ट में पहुंचा सैनीयान ट्रस्ट का विवाद

महेन्द्र तोंदवाल
कार्यकारी सम्पादक

रोहतक। सैनीयान ट्रस्ट सैनीपुरा के प्रधान तथा सचिव की कार्यप्रणाली विवादों के घेरे में आ गई है। स्थानीय सैनीपुरा के तीन बाशिंदों- रामरूप सैनी, जीवन राम सैनी तथा बलबीर सिंह सैनी- ने उक्त दोनों पदाधिकारियों के खिलाफ स्थानीय कोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें दोनों पर सैनीयान ट्रस्ट के फंड का दुरुपयोग करने, ट्रस्ट सम्बंधी दस्तावेजों को अपने पास छिपाकर रखने तथा ट्रस्ट के संविधान की धज्जियां उड़ाने सरीखे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। साथ ही शिकायतकत्र्ताओं ने कोर्ट से दोनों पदाधिकारियों को उनके पद से हटाकर ट्रस्ट के चुनाव विधिवत रूप से करवाने की गुहार भी लगाई है। कोर्ट ने इस सम्बंध में सैनीयान ट्रस्ट के प्रधान बलजीत सैनी तथा सचिव चमत्कार सैनी को नोटिस जारी कर उन्हें इस मामले में अपना पक्ष रखने के लिए कहा है।
याचिका में रामरूप सैनी, जीवन राम व बलबीर सिंह का कहना है कि वर्ष 1958 में सैनीपुरा कालोनी के अनेक लोगों द्वारा अपनी अचल सम्पत्ति को दान देकर सैनीयान ट्रस्ट का गठन किया था। उस समय इसके सात ट्रस्टी बनाए गए थे, जिनके कंधों पर ट्रस्ट की सम्पत्ति को संभाल कर रखने तथा इससे होने वाली आय का इस्तेमाल सैनीपुरा में रहने वाले आम आदमी के लाभार्थ तथा सैनी समाज के कल्याणार्थ करने की जिम्मेवारी थी मगर ट्रस्ट के वर्तमान प्रधान तथा सचिव ट्रस्ट के इन सभी उद्दश्यों को धत्ता साबित करते हुए न तो इसकी सम्पत्ति एवं खातों का सही तरीके से रखरखाव एवं संचालन कर रहे हैं और न ही सैनीपुरा के किसी बाशिंदे को ट्रस्ट की सम्पत्ति व खातों बारे में जानबूझकर कोई जानकारी दे रहे हैं। बल्कि दोनों ही पदाधिकारी ट्रस्ट की आय का इस्तेमाल गैर-कानूनी रूप से अपने निजी हितों को साधने के लिए कर रहे हैं।
शिकायतकत्र्ताओं का कहना है कि प्रधान बलजीत सैनी का तीन वर्षीय कार्यकाल वर्ष 2007 में खत्म हो चुका है बावजूद इसके चुनाव नहीं करवाए जा रहे हैं। शिकायतकत्र्ताओं का आरोप है कि ट्रस्ट के प्रधान व सचिव ने ट्रस्ट के अढ़ाई लाख रुपए की एक भारी-भरकम राशि एक मंदिर के निर्माण के लिए दान में दे दी जबकि उन्हें ऐसा करने का कानूनन कोई अधिकार ही नहीं था क्योंकि इस सम्बंध में कोई भी प्रस्ताव ट्रस्ट की बैठक में अधिसंख्य ट्रस्टियों द्वारा पास नहीं किया गया था। जिससे यह साबित होता है कि प्रधान व सचिव ट्रस्ट के हितों की बजाए इसके अहित के लिए कार्य कर रहे हैं। रामरूप सैनी, जीवन राम तथा बलबीर सिंह सैनी का कहना है कि उन्होंने ट्रस्ट के प्रधान व सचिव से ट्रस्ट का रिकार्ड ,फंड, इसकी आय व खर्चे के साथ-साथ ट्रस्ट द्वारा पारित प्रस्ताव दिखाने का आग्रह लिखित में किया था मगर दोनों ही पदाधिकारियों ने ट्रस्ट का रिकार्ड दिखाने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। इसके बाद उन्होंने दोनों पदाधिकारियों को कानूनी नोटिस देकर भी रिकार्ड का निरीक्षण करना चाहा मगर तब भी उन्होंने इस संबंध में कोई जवाब नहीं दिया। इसके उपरांत ही उन्हें मजबूरीवश कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

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