सोमवार, अगस्त 31, 2009

संपादक की कलम से

एकजुटता ही दिला सकती है मुकाम


चंदर प्रकाश सैनी


जैसे-जैसे हरियाणा में विधानसभा चुनावों का समय नजदीक आता जा रहा है वैसे-वैसे सैनी बिरादरी के नेताओं में भी बड़े राजनैतिक दलों की टिकटों के लिए संघर्ष शुरू हो गया है। ऐसा होना स्वाभाविक भीथा क्योंकि नेताओं के लिए चुनाव ही अपना सामथ्र्य सिद्ध करने और अपनी किस्मत बनाने का मौका होता है। मगर जिस प्रकार से सैनी बिरादरी के नेताओं में एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ लगी हुई है, वह कहीं इस बार भी बिरादरी के लिए घातक साबित न हो जाए, इससे इंकार नहीं किया जा सकता क्योंकि अभी तक हर चुनाव में यह होता आया है कि सैनी बिरादरी के किसी भी नेता को जब किसी बड़ी पार्टी का टिकट मिल जाता है तो बिरादरी के ही वे अन्य नेता उसे अपने आप ही अपना दुश्मन मान लेते हंै जो टिकट की स्पर्धा में उसके साथ दौड़ रहे थे और आखिरी वक्त पर बाजी हार गए। ऐसे समय में बिरादरी हितों को मद्देनजर रखते हुए होना तो यह चाहिए कि हारे हुए नेता भी राजनैतिक प्रतिस्पर्धा को एक तरफ रखते हुए स्वयं उस नेता के लिए वोट मांगे और उसे जीताने का भरसक प्रयास करें क्योंकि कोई भी बिरादरी व्यक्तिगत प्रयासों से न तो प्रगति कर सकती है और न ही संगठित हो सकती है। मगर क्या करें हमारे लिए बिरादरी के विकास की बजाए निजी सफलता ज्यादा जरूरी है। तभी तो हर चुनाव में हम किसी भी पार्टी से उतनी भी टिकटें हासिल नहीं कर पाते, जितनी सीटों पर हमारा हक बनता है। जैसे ही चुनाव नजदीक आते हैं वैसे ही हम अलग-अलग धड़ों में बंटकर अपने ही स्टाइल में कितनी भी सीटों की मांग राजनैतिक दलों के आकाओं से करने लगते हैं। कोई बिरादरी के लिए 10 सीटें मांगता है तो कोई 15 और कोई 20 सीटों पर ही अपनी दावेदारी पेश कर देता है। इतना सब होने के बावजूद किसी भी राजनीतिक दल पर आज तक हम इतना दवाब नहीं बना पाए है कि वह पूरी मांग मानने की बात तो दूर तीन या चार सीट भी हमारी झोली डाल दे। साथियों, एक बार फिर वही वक्त आ गया है और इस बार फिर हमारे पास मौका है कि हम अपनी ताकत राजनीतिक दलों को दिखाकर उनसे अपनी इस बरसों पुरानी मांग को मनवा सकें। मगर यह तभी संभव है जब हम एकजुट होकर इन दलों पर दबाव बनाए। यदि हम ऐसा नहीं कर पाए तो पुराने नतीजे में बदलाव की संभावना कम ही है।

लाड़वा हलके में हैं सैनी बिरादरी की सर्वाधिक वोट

सैनी समाज के लिए विस का द्वार खोलेगी लाड़वा सीट?

राजेंदर सैनी/ समाचार संपादक

लाड़वा (कुरुक्षेत्र)। धर्मस्थली कुरुक्षेत्र का लाड़वा हलका सैनी बिरादरी के लिए एक बार फिर हरियाणा विधानसभा के द्वार खोल सकता है। परिसीमन आयोग की नई संरचना के चलते इस बार अस्तित्व मेंं आया लाड़वा प्रदेश का संभवतया ऐसा विधानसभा हलका है जहां आगामी विधानसभा चुनाव में हर प्रत्याशी के भाग्य का फैसला सैनी बिरादरी के हाथों में होगा। करीब सवा लाख मतदाताओं वाली इस विधानसभा में अकेले सैनी बिरादरी के 30 हजार के करीब वोट है, जो यदि एकजुट हो गए तो किसी भी सैनी प्रत्याशी को विधानसभा का प्रतिनिधित्व देने में निसंदेह कारगर साबित हो सकते हैं मगर पूर्व की भांति यह हलका भी अब धीरे-धीरे कर सैनी नेताओं की रणभूमि का गवाह बनता नजर आ रहा है। विधानसभा चुनावों की आहट के बाद जिस तरह से सैनी बिरादरी के नेताओं की सरगर्मी इस हलके में एकाएक बढ़ी है, वो आगे चलकर निश्चित तौर पर सैनी समाज के भविष्य पर सवालिया निशान लगा सकती है। जहां तक सैनी बिरादरी के नेताओं की टिकट की दावेदारी की बात है तो अभी तक पांच नेताओं का नाम उभरकर सामने आ है, जिनमें से तीन कांगे्रस (साहिब सिंह सैनी, कैलाशो सैनी व हरिकेश सैनी) तथा एक बसपा (शशि सैनी) व एक भाजपा (रमेश सैनी) से हैं। सबसे पहले बात करते हैं साहिब सिंह सैनी की। साहिब सिंह थानेसर से विधायक रहे हैं और फिलहाल कुरुक्षेत्र जिला कांग्रेस के वर्किंग प्रेजीडेंट के साथ-साथ हरियाणा प्रदेश कांग्रेस के संगठन सचिव की जिम्मेवारी भी निभा रहे हंै। परिसीमन आयोग ने जब से लाड़वा हलके का सृजन किया है तभी से वे इस हलके में सक्रिय है और निरंतर संभाएं कर खासतौर पर सैनी बिरादरी को लामबंद करने में जुटे हैं। साहिब सिंह के करीबियों का कहना है कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा का इशारा मिलने के बाद से ही उन्होंने अपना चुनाव प्रचार करने में जुटे हुए हैं। वैसे भी पिछले दिनों उनके एक समर्थक के घर पधारे हरियाणा प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष फूलचंद मुलाना ने भी हाईकमान से उनकी टिकट के लिए वकालत करने के स्पष्ट संकेत दिए थे। इतना ही नहीं पुराने कांग्रेसी होने का फायदा भी उन्हें मिल सकता है। यही वजह है कि साहिब सिंह अपनी टिकट को लेकर आश्वस्त एवं सशक्त नजर आ रहे हैं और पूरी तैयारी के साथ हलके का दौरा करने में व्यस्त हैं। यहां से कांग्रेस टिकट के लिए एक दूसरी मजबूत दावेदार है पूर्व सांसद कैलाशो सैनी, जो विगत लोकसभा चुनाव में ही इनेलो छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुई है। सैनी बिरादरी में खासा प्रभाव रखने वाली कैलाशो ने हालांकि अभी तक खुलकर लाड़वा से अपनी दावेदारी पेश नहीं की है। मगर फिर भी लाड़वा क्षेत्र के लोगों से लगातार सम्पर्क में रहने की वजह से यहां से उनकी दावेदारी की चर्चाएं अब आम हो गई है। कैलाशों के करीबियों का कहना है कि वह कांग्रेस की टिकट चाहती है मगर उन्होंने अभी अपना हलका तय नहीं किया है। लिहाजा लाड़वा के साथ-साथ रादौर हलके में भी वह अपनी संभावनाएं तलाश रही हैं। साथ ही उनका यह भी कहना है चूंकि कांग्रेस में शामिल होते वक्त मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने उन्हें टिकट देने का भरोसा दिलाया था लिहाजा किसी न किसी विधानसभा हलके से उन्हें टिकट मिलना तय है। इसी वजह से उन्होंने अपना चुनाव प्रचार दो-तीन हलको में शुरू कर दिया है।तीसरे दावेदार है बाबैन मार्किट कमेटी के चेयरमैन हरिकेश सैनी। हरिकेश की गिनती सांसद नवीन जिंदल के करीबियों में होती है। इसलिए वे नवीन जिंदल के माध्यम से कांग्रेस हाईकमान पर प्रैशर बनाने में जुटे हैं और उन्हें उम्मीद है कि वे अपने मिशन में कामयाब जरूर हो जाएंगे। हरिकेश भी लाड़वा हलके में अपने बिरादरी भाइयों से सम्पर्क साधने में जुटे हैं।चौथी दावेदार शशि सैनी है। शशि सैनी ने वर्ष २००० में कांग्रेस टिकट पर थानेसर से विधानसभा चुनाव लड़ा था मगर पिछले लोकसभा चुनाव में वह कांग्रेस छोड़कर बसपा में शामिल हो गई थी। बसपा पार्टी से टिकट की यह सबसे मजबूत दावेदार है और सैनी बिरादरी में भी उनका प्रभाव माना जाता हैं। लिहाजा कांग्रेस से किसी सैनी प्रत्याशी को टिकट मिलने के बाद यदि बसपा से शशि सैनी भी मैदान में आती है तो मुकाबला रोचक हो जाएगा। यदि सैनी बिरादरी के नेताओं को छोड़ दिया जाए तो थानेसर के विधायक रमेश गुप्ता भी अपना हलका छोड़ यहां से कांग्रेस टिकट लेने की फिराक में नजर आ रहे हैं। भाजपा के प्रदेश संगठन सचिव रमेश सैनी की गिनती भी भाजपा टिकट पाने वाले दावेदारों में प्रमुखता से की जा रही है। हालांकि पवन सैनी ने अभी तक विधानसभा का कोई भी चुनाव नहीं लड़ा है मगर पार्टी में प्रभाव के चलते उनको भी टिकट मिलने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। वैसे सैनी बहुल क्षेत्र होने से उनकी दावेदारी भी मजबूत बनती है।यदि लाड़वा विधानसभा क्षेत्र के मतों के समीकरण पर नजर डाली जाए तो सैनी बिरादरी के अलावा यहां जाटों के करीब २४ हजार, हरिजन की १०७३४, झीमर जाति की ९५००, ब्रह्माणों की ७५००, पंजाबी ५ हजार, रोड ३१००, वैश्य तीन हजार तथा अन्य जातियों की करीब ६७०८ वोट हैं।
सैनी पंचायत का शिकार हुआ प्रेमी युगल

जोगिन्दर सैनी

मुरादाबाद। जाट बिरादरी की खाप पंचायतों की भांति सैनी जाति की पंचायतें भी फरमान सुनाने और उन्हें क्रियान्वित करवाने में कतई पीछे नहीं है। यह सच्चाई एक बार फिर उस समय उजागर हो गई जब उत्तरप्रदेश के मुरादाबाद शहर में सैनी बिरादरी से ताल्लुक रखने वाले एक प्रेमी युगल के इश्क की चर्चा सार्वजनिक होने के बाद सैनी बिरादरी की पंचायत ने प्रेमी युगल को सरे-बाजार गंजा करवा उसका जुलूस निकाल दिया। जिसने भी यह नजारा देखा वह हैरान था क्योंकि आगे-आगे सिर मुंडवाए प्रेमी, उसके पीछे प्रेमिका और सबसे पीछे तमाशबीन।हुआ यूं कि कुंदननगर मोहल्ले में रहने वाले विजय का पड़ोस में ही रहने वाली बबीता से चोरी-छिपे प्रेम प्रसंग चल रहा था। चूंकि दोनों ही एक ही बिरादरी और एक ही गोत्र से सम्बंध रखते थे इसलिए चाह कर भी वे एक-दूसरे के घरवालों को यह बात बता नहीं पा रहे थे। मगर कुछ रोज पहले बबीता के घरवालों को विजय के साथ उसके महोब्बत के रिश्ते का पता चल गया। जब इस प्रेम की चर्चा आम हुई तो बबीता के पिता ने बिरादरी की पंचायत बुलाई और इस मामले पर फैसला लेने की गुहार लगा डाली। पंचायत में विजय और बबीता भी पेश हुए और उनसे उनके इरादे पूछे गए। दोनों ने कहा कि बालिंग हैं और शादी करना चाहते हैं। यह बात पंचायत को नागरवार गुजरी और उसने युगल को सार्वजनिक रूप से बेइज्जत करने का फरमान सुना दिया। विजय को बेरहमी से पंचायत में पीटा गया और फिर बाल काटकर गांव में जुलूस निकाला गया। इस सबके बावजूद विजय पर छाया प्यार का नशा कम नहीं हुआ और उसने बबीता को पाने के लिए वकील के जरिए पुलिस से गुहार लगा डाली। मामला संगीन होता देखकर पुलिस बबिता के घर पहुंची तो वह कमरे में कैद मिली। पुलिस ने उसे अपनी सुपुर्दगी में लेते हुए सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया।

प्रदीप सैनी ने दे रखी है अंधेपन को मात

नई दिल्ली: उनकी दुकान रात के अंधेरे में भी खुली रहती है क्योंकि उनके लिए दिन के उजाले और रात के अंधेरे में कोई फर्क नहंी है। उनकी दुनिया हमारी तरह रंगीन नहीं है। उनकी दुनिया में एक ही रंग है ब्लैक। जी हां, वे देख नहीं सकते पर जिंदगी से लडऩे का जज्बा उनमें कुछ ऐसा है कि अच्छे-अच्छे को शर्म आ जाए। एक अंधेपन के अलावा यूरिन ब्लॉडर कैंसर से भी लड़ रहा है तो दूसरे ने यह ठान रखा है कि वह देख न पाने के बावजूद अपनी पढ़ाई जार रखेगा।लेकिन बात यहां खत्म नहीं हो जाती क्योंकि उन्हें सिर्फ अपने अंधेपन से ही नहीं लडऩा होता है बल्कि हर रोज शराबियों, भ्रष्ट सरकारी कर्मचारियों और पुलिस से भी जूझना पड़ता है। रात में चलने वाले नाइट क्लबों में भी बॉक्सर रखे जाते हैं जहां शहर की जैंट्री जाती है फिर ये तो सड़क किनारे रात में चाय, कोल्ड ड्रिंक बेचते हैं जहां हर तरह के लोगों को हर राज डील करना पड़ता है।मूल रूप से बिहार के कटिहार इलाके के रहने वाले 26 साल के प्रदीप सैनी दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्राचार से बीए कर रहे हैं। यही नहीं इस छोटी सी दुकान से वे अपने दो छोटे भाइयों की पढ़ाई का खर्चा भी उठाते हैं जो सातवीं और दसवीं कक्षा में पढ़ रहे हैं। उनका कहना है कि वे लोग यूं ही पटरी पर दुकान चलाने को मजबूर है। वे चाहते हैं कि कम से कम सरकार उन्हें एक जगह दे दें, जिसमें वे अपनी दुकान चला सकें और हर राजे की सिरदर्दी से बच सकें। उनकी दुकान में रात-बेरात आसपास रहने वाले स्टूडेंटस आकर जरूरत का सामान ले लेते हैं। उनके यहां नमकीन, बिस्कुट, मैगी वगैरह के अलावा राशन का जरूरी सामान भी मिल जाता है। पटरी पर चलने वाली यह दुकान ही इन दोनों का घर है लेकिन यहां भी उनकी मुश्किलें हैं। अभी तो दिन में कभी एमसीडी वाले और रात में पुलिस वाले हड़का जाते हैं। उन्होंने बताया कि बारिश के सीजन में तो पूरी दुकान में पानी भर जाता है। इस बात के लिए वे लोग मुख्यमंत्री शीला दीक्षित से लेकर एमसीडी के अधिकारियों तक के चक्कर लगा लगा कर थक चुके हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।करीब 30 साल के उमेश मंडल 1992 में कानपुर से दिल्ली आए थे । चेचक की वजह से अपनी अंाखों की रोशन खाने वाले उमेश ने बताया कि जब उन्हें अपने कैंसर के बारे में पता चला तब उन्होंंने अपने घरवालों से कोई मदद नहीं मांगी और अपने इलाज का सारा खर्चा खुद ही उठाया। हालांकि सरकारी अस्पतालों से उन्हें शिकायत है कि एम्स से लेकर योगानंद शास्त्री तक हर जगह से उन्हें धक्के ही खाने पड़े कहीं कोई इलाज नहीं हुआ। अपोलो में जरूर फ्री इलाज का वादा किया पर वहां भी दवाइयों का खर्चा खुद ही उठाना पड़ा, जो कि बस के बाहर की बात है। एक आप्रेशन भी हो चुका है और उसके बाद चलने फिरने से भी मोहताज होना पड़ा। डाक्ॅटर कहते हैं कि एक ऑप्रेशन और होना है पर अब तक पैसे नहीं जोड़ पाया हूं।प्रदीप और उमेश दोनों का बस यही कहना है कि सरकार अगर उन्हें बसा नहीं सकती तो कम से कम उजाड़े नहीं। कम से कम जो रोजी रोटी का जो सहारा है वो न छीने। प्रदीप इस साल गे्रजुएट हो जाएंगे, बस उनका इतना कहना है कि सरकार अगर उन्हें नौकरी नहंी दे सकती तो कम से कम दुकान चलाने के लिए एक जगह एलॉट कर दे जिससे वह खुद मेहनत करके जी सकें। साभार नवभारत टाइम्स

रविवार, अगस्त 30, 2009

संशिप्त समाचार

अमरजीत सैनी बने हजंका जिला प्रधान

कुरुक्षेत्र । अमरजीत सैनी को हरियाणा जनहित कांग्रेस की कुरुक्षेत्र इकाई का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इससे पूर्व, अमरजीत पार्टी में ही प्रदेश सचिव के पद का कार्यभार भी संभाल चुके हैं।

रामनिवास राड़ा हिसार के अध्यक्ष नियुक्त

हिसार। पार्षद रामनिवास राड़ा (सैनी) को हरियाणा जनहित कांग्रेस के हिसार हलके का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। श्री राड़ा नगर परिषद हिसार के निलम्बित चेयरमैन बिहारी लाल राड़ा के भाई है।

ट्रिपल जम्प में नवनीत सैनी ने मारी बाजी

चंडीगढ़। हाल ही में यहां सम्पन्न हुई यूटी एथलेटिक्स प्रतियोगिता की गल्र्ज अंडर-20 आयु वर्ग में नवनीत सैनी ने 10।25 मीटर छलांग लगाकर पहला स्थान हासिल किया है।

सैनी समाज को 20 टिकटें देने की मांग

झज्जर। सैनी समाज के लोगों की बैठक स्थानीय सैनी धर्मशाला में आल इंडिया सैनी महासभा झज्जर के अध्यक्ष मंगतराम सैनी की अध्यक्षता में हुई। जिसमें सैनी समाज से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई। बैठक एक प्रस्ताव पारित कर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनावों में कम से कम 20 टिकट सैनी समाज को देने की मांग कांग्रेस पार्टी से की गई।

बिहारी लाल राड़ा की गुजारिश नामंजूर

हिसार। नगर परिषद हिसार के निलम्बित प्रधान बिहारी लाल राड़ा (सैनी) द्वारा वित्तायुक्त से की गई प्रधान पद बहाल करने की गुजारिश नामंजूर हो गई है। इसके अलावा उनकी सदस्यता बहाली की मांग पर स्थानीय निकाय विभाग के निदेशक ने अगली सुनवाई 9 सितम्बर को मुकर्रर की है। ध्यान रहे गत माह राड़ा को चेयरमैन पद से एकाएक हटा कर उनकी जगह उपप्रधान को इस पद कार्यभार सौंप दिया गया था।

सैनी स्कूल में हुई मेहंदी प्रतियोगिता

रोहतक । सैनी गल्र्ज सीनियर सैकेंडरी स्कूल में मेहंदी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। स्कूल प्राचार्य बी।डी. मदान ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान छात्राओं ने नए-नए डिजाइन की मेहंदी लगाकर अपनी सृजनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

मामचंद सैनी का निधन
रोहतक। सुखपुरा में रहने वाले मामचंद सैनी का 21 अगस्त को निधन हो गया। वे 72 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे।

गए थे शिकायत करने, हो गए गिरफ्तार

किशन सैनी

नई दिल्ली।

नगर निगम दिल्ली एमसीडी की पार्षद वीना सैनी के पति नरेश सैनी को उस समय लेने के देने पड़ गए जब वे कमिशनर के पास गए तो कर्मचारियों की शिकायत करने थे मगर हो गई खुद की शिकायत। एमसीडी कमिशनर के।एस। मेहरा ने नरेश सैनी पर धमकाने का आरोप लगाते हुए न केवल पुलिस बुला ली, बल्कि नरेश के खिलाफ सरकारी कामकाज में बाधा डालने की शिकायत कर उन्हें गिरफ्तार भी करवा दिया।दरअसल हुआ यूं कि एमसीडी मुख्यालय टाऊन हाल में कोई बैठक चल रही थी और कमिशनर मेहरा अपने ऑफिस में कुछ पार्षदों से बात कर रहे थे। इसी दौरान पार्षद वीना सैनी और अपने पति नरेश सैनी के साथ वहां पहुंच गई। चूंकि नरेश सैनी एमसीडी के वेस्ट जोन के कुछेक भ्रष्ट कर्मचारियों की शिकायत लेकर कमिशनर के पास पहुंचे थे इसलिए उन्होंने अपना शिकायती पत्र कमिशनर साहब को देते हुए इस पर तुरंत कार्रवाई करने की गुहार कर डाली। कमिशनर का कहना है कि जब उन्होंने कार्रवाई करने का आश्वासन दिया तो नरेश सैनी ने उनके साथ बदसलूकी की जबकि नरेश सैनी ऐसी किसी बात से इंकार करते हैं। इसी बीच, कमिशनर ने फोन कर मुख्यालय में पुलिस बुला ली और एसएचओ सुनील श्रीवास्तव से नरेश सैनी के खिलाफ सरकारी कामकाज में बाधा उत्पन्न करने की शिकायत कर डाली लेकिन तब तब नरेश अपनी पार्षद पत्नी वीना सैनी के साथ वहां से जा चुके थे। चूंकि पुलिस पर कमिशनर साहब की शिकायत का दबाव था इसलिए वह नरेश को तलाशती हुई कांग्रेस कार्यालय जा पहुंची, जहां नरेश अपनी पत्नी के साथ बैठे थे। कुछ ही पल में एसएचओ साहब ने नरेश सैनी को गिरफ्तार कर थाने ले गए।

स्वच्छ वातावरण के लिए जरूरी हैं पौधे : विजय सैनी

सैनी सोसायटी रोहतक में हुआ पौधारोपण

महावीर सैनी रोहतक।

सैनी एजूकेशन सोसायटी के तत्वावधान में सैनी गल्र्ज स्कूल के प्रांगण में पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्यातिथि सोसायटी प्रधान विजय सैनी थे, जिन्होंने पौधारोपित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर अपने सम्बोधन में विजय सैनी ने कहा कि मनुष्य के जीवन के लिए पेड़ों का अति महत्व है। वृक्ष न केवल मानव जीवन के लिए जरूरी है बल्कि एक स्वच्छ वातावरण के लिए भी आवश्यक है।उन्होंने बताया कि सैनी एजूकेशन सोसायटी परिसर को हरा-भरा करने के लिए हर वर्ष पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। कार्यक्रम के दौरान सैकड़ों पौधे रोपित कर सावन माह का भी सदुपयोग किया जाता है। विजय सैनी ने बताया कि एक बार तो पौधारोपण कार्यक्रम में सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत कर अपने कर-कमलों से पौधारोपित किया था और यह पौधा आज अपने यौवन पर पहुंचकर सोसायटी परिसर को हरा-भरा बनाने में अपना योगदान दे रहा है। सोसायटी सचिव सतपाल सैनी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए पौधारोपण के महत्व पर प्रकाश डाला और उपस्थितजनों से अधिक से अधिक पौधारोपण करने का आह्वान किया। इस अवसर पर सोसायटी के सहसचिव सुभाष सैनी, कोषाध्यक्ष रोहतास आर्य, सुरेश सैनी, मैनेजर किशन सिंह कोच, सूरजभान सैनी, देवी सिंह, अशोक सैनी, महेंद्र तोंदवाल, रामरूप सैनी, ईश्वर सैनी, अविनाश सैनी, जिले सिंह, राजेंद्र सैनी के अलावा स्कूलों के प्राचार्य आरपी चौधरी, बीडी मदान, संगीता अरोड़ा व सीमा सैनी मुख्य रूप से मौजूद थीं।

अनूप सैनी की गोली मारकर हत्या


संदीप सैनी,गोहाना।

कपड़ा व्यापारी एवं विश्व हिंदु परिषद के जिला महासचिव 45 वर्षीय अनूप सैनी विगत 30 जुलाई की रात गोहाना-पानीपत रोड स्थित चूंगी पर गोली मारकर हत्या कर दी गई। हत्यारे जाते वक्त उनसे 70 हजार रुपए भी लूट कर ले गए। इस हत्याकांड से भड़के नागरिकों ने राष्ट्रीय राजमार्ग नंबर-71 ए को जाम कर दिया और पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।जानकारी के मुताबिक रात के वक्त अनूप सैनी मोटरसाइकिल पर अपने बड़े बेटे हिमांशु सैनी के साथ मेन बाजार स्थित अपनी दुकान से गांव गढ़ी उजाले खां लौट रहे थे। उस वक्त एक अन्य मोटरसाइकिल पर सवार दो अज्ञात बदमाश पुरानी सब्जी मंडी के साथ ड्रेन नंबर-8 के पुल से उनका पीछा कर रहे थे। अनूप के हाथ में 70 हजार रुपए से भरा एक बैग भी था।जैसे ही अनूप सैनी गांव गढ़ी उजाले खां की पुलिया के पास पहुंचे तो पीछे से आ रही बाइक पर सवार बदमाशों ने उन पर गोलियां चला दीं तथा उनसे नोटों वाला बैग लेकर वापस शहर की ओर भाग गए।अनूप को घायलावस्था में सरकारी अस्पताल में भर्ती करवाया गया जहां से उन्हें रोहतक के पीजीआईएमएस में भेज दिया गया। रोहतक पहुंचने पर उन्हें मौत घोषित कर दिया गया। वहीं, अनूप सैनी की हत्या होने की सूचना मिलते ही विश्व हिंदु परिषद के कार्यकत्र्ताओं के साथ कपड़ा विक्रेता व सैनी समाज के लोग भड़क गए और उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग नंबर-71 को जाम कर दिया। अनूप सैनी के परिवार में 3 बेटे व 2 बेटियां है।

बंधक बना संजय सैनी से डेढ़ लाख लूटे

संदीप सैनी, गोहाना।

अनूप सैनी की हत्या के बाद बदमाशों ने एक और सैनी युवक को अपना शिकार बना डाला। विगत 5 अगस्त को गांव गढ़ी उजाले खां में रहने वाले ट्यूबवैल बोरिंग का काम करने वाले संजय सैनी को बंधक बनाकर बदमाशों ने करीब डेढ़ लाख रुपए लूट लिये। हुआ यूं कि बदमाशों ने संजय सैनी को फोन कर उसे ट्यूबवैल बोर करवाने के बहाने पानीपत चुंगी से मिलाप होटल के पिछवाड़े बने एक वीरान मकान में बुलवा लिया। कुछ देर बातचीत करने के बाद संजय सैनी को बदमाशों ने बंधक बना लिया। संजय सैनी के अनुसार बदमाशों ने उसे आतंकित करने के लिए उसकी कनपटी से रिवाल्वर सटा दिया तथा एक गोली चला दी जो उसकी टांगों के बीच से होती हुई जमीन में जा धंसी। बाद में बदमाशों ने संजय सैनी के मोबाइल से ही उसके मित्र विजय ङ्क्षजदल को फोन करवाया और स्पीकर खोलकर संजय सैनी से ही 50 हजार रुपए मंगवा लिए। यह राशि मिलने के बाद बदमाशों ने उसके पार्टनर जोगेंद्र सैनी को फोन मिलाकर उससे भी एक लाख रुपए मांग लिये। संजय सैनी का कहना है कि एक बदमाश बाइक पर स्वयं उसके पीछे रिवॉल्वर सटाकर बैठा तथा उसी के कार्यालय से एक लाख रुपए और ले आया। दो लोगों से पैसे लेने के बाद रात को उसे छोड़ दिया गया। अगले दिन जैसे ही इस घटना की जानकारी गांव गढ़ी उजाले खां के लोगों को मिली तो उनमें हड़कम्प मच गया। बाद में सैनी बिरादरी पर बढ़ते हमले के मद्देनजर गढ़ी सराय दार खां, दरिया पुर, सैनीपुरा और इंद्रगढ़ी के लोगों ने पंचायत बुला ली। गजब तब हुआ जब पंचायत के बीच में ही एक बदमाश का फोन संजय सैनी के मोबाइल पर आ गया। इसके बाद पंचायतियों ने मामले पर विचार-विमर्श किया तथा बाद में डीएसपी राव जयपाल सिंह के पास पहुंचकर उन्हें सम्पूर्ण घटनाक्रम से अवगत करवाया।

खतरनाक है बेमतलब स्वाइन फ्लू की दवाएं लेना

नई दिल्ली। स्वाइन फ्लू की दहशत में बेमतलब दवाएं खाना खतरनाक साबित हो सकता है। एक्सपट्र्स का कहना है चंूकि भारत में भी इस बीमारी ने अब पैर पसारना शुरू कर दिया है लिहाजा इस मामले में पूरी तरह एहतियात बरतने की जरूरत है। बिना बीमारी के एंटी-वायरल दवाएं खाने से शरीर में इस बीमारी के वायरस के रेजिस्टेंस डिवेलप हो सकते हैं, जिससे बीमारी होने पर दवाओं का असर नहीं होगा। इंडियनमेडिकल एसोसिएशन के प्रवक्ता नरेंद्र सैनी का कहना है कि स्वाइन फ्लू के इलाज में दो एंटी-वायरल दवाएं-टेमी फ्लू और ओसेल टेमीवीयर इस्तेमाल होती है। ये दवाएं सरकार अभी खुले मार्किट में उपलब्ध नहीं करा रही है, फिर भी केमिस्ट इसे बेच रहे हैं। अवैध तरीके से हासिल की गई ये दवाएं काफी महंगी तो है ही साथ ही इनके नकली होने का खतरा भी काफी है। उनका कहना है कि फिलहाल बीमारी से बचाव के उपयों का गंभीरता से लेने और प्रभावित देशों से आने वाले लोगों के प्रति अलर्ट रहने की जरूरत है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों का भी कहना है कि ख्ुाले मार्किट में स्वाइन फ्लू की दवाओं की बिक्री पर रोक है। ऐसे में इन्हें अपनी मर्जी से केमिस्ट से खरीदकर न खाएं।
साभार नवभारत टाइम्स

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पहली बार आया है कोई ऐसा समाचार पत्र
हर रोज की भांति कार्यालय से अपने घर पहुंचा तो टेबल पर रखे सैनी संवाद को पढ़कर न केवल सैनी समाज में हो रही गतिविधियों की विस्तृत जानकारी मिली, बल्कि इस बात की खुशी भी हुई कि पहली बार समाज का कोई ऐसा समाचार पत्र आया है, जिसमें समाज से जुड़ी सटीक व नई जानकारियां प्रदान की गई हैं। इससे भी ज्यादा शकून की बात यह है कि पत्र को सेवाभाव व सैनी समाज को जागृत करने के मकसद से ही आरंभ किया गया है जो निसंदेह भविष्य में समाज को दिशा एवं दशा देने में अहम भूमिका निभाएगा। सम्पादक महोदय, अगर समाचार पत्र में मैटरीमोनियल भी शुरू कर दिया जाए तो सैनी समाज में मैरिज मैच को लेकर आ रही परेशानियों पर काफी हद तक पार पाया जा सकता है।
- ईश्वर सिंह सैनी, रोजला